बुजुर्गों का आशीर्वाद किसी वरदान से कम नहीं

जॉर्ज बहुत ही नेक स्वभाव के थे। एक दिन उन्होंने एक विकलांग वृद्धा को देखा जिसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। वह वील चेयर पर बैठी रहती थीं। अक्सर उनके वील चेयर को कोई नेक मनुष्य इधर से उधर घुमा जाता था। एक बार जॉर्ज ने उन्हें बगीचे में सुंदर फूलों को निहारते पाया तो उनसे बोला, माताजी, आप बगीचे के फूलों को इतना ध्यान से क्यों देख रही हैं? वृद्धा बोलीं, बेटा, मैं यह देख रही हूं कि प्रकृति कितनी सुंदर है। उसने पूरी दुनिया में अलग-अलग रंग भरे हैं। इसी कारण हम सभी अनेक कमियों के होते हुए भी बेहद धनवान हैं।

वृद्धा के ये शब्द जॉर्ज के हृदय को छू गए। अब वह जब भी बगीचे में घूमने आते तो अक्सर वृद्धा को वील चेयर पर इधर से उधर घुमाते। इस दौरान उन्होंने देखा कि वील चेयर के लोहे के पहिए जब ऊबड़-खाबड़ जमीन पर चलते, तो गहरे झटके लगते थे। इससे वृद्धा को बहुत तकलीफ होती थी। जॉर्ज बेहद बुद्धिमान थे। उन्होंने उस वील चेयर में सुधार करने की सोची जिससे वृद्धा की जिंदगी आरामदायक बन सके। इसी दौरान उनकी नजर एक ऐसे पदार्थ पर पड़ी जो बेहद कोमल और लचीला था। वह रबर था। उन्होंने रबर के गुच्छे लिए और लोहे के पहियों के किनारों पर उन्हें कसकर लपेट दिया। इससे वील चेयर पर धक्के लगने कम हो गए और वृद्धा को भी बहुत राहत मिली।

उसने जॉर्ज को ढेरों आशीर्वाद दिए और बोली, देखना बेटा, तुम एक दिन इस दुनिया में बहुत नाम कमाओगे। वृद्धा की बात सत्य साबित हुई। जॉर्ज ने अपनी मेहनत से रबर के टायर्स बनाने आरंभ कर दिए जो शीघ्र ही पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो गए। कुछ ही समय में उनकी गिनती विश्व के अमीर और नेकदिल लोगों में होने लगी। ये जॉर्ज सी डनलप थे जिनके रबर के बनाए टायर आज भी दुनिया भर में लोकप्रिय हैं।

(साई फीचर्स)



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