भगवान भरोसे स्वास्थ्य व्यवस्थाएं

(शरद खरे)

जिले में पिछले कुछ सालों से अजीब रिवाज चल पड़ा है। सरकारी विभागों के जिला प्रमुखों के द्वारा तरह-तरह के फरमान जारी किये जाते हैं किन्तु उन आदेशों की तामीली हो रही है अथवा नहीं? यह देखने की फुर्सत किसी भी अधिकारी को नहीं रहती आयी है।

इसका एक नायाब उदाहरण 25 अक्टूबर को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा एक आदेश जारी कर जिले में चिकित्सा करने वाले चिकित्सकों को निर्देशित किया गया था कि वे जिस पैथी से इलाज के लिये डिग्री लेकर बैठे हैं उसकी पूरी जानकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में पाँच दिनों में जमा करवायें।

इस आदेश को जारी हुए पाँच क्या सत्तर दिन के ऊपर हो चुके हैं पर इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के द्वारा मानो आदेश जारी कर उसे बिसार दिया गया है। आज झोला छाप चिकित्सकों के द्वारा धड़ल्ले से एलोपैथी के तौर तरीकों से इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा आयुर्वेद और होम्योपैथी से पढ़ाई कर डिग्री लेने वाले चिकित्सक भी अपनी पैथी को तजकर एलोपैथी में इलाज कर रहे हैं।

जिले में कितने निजि क्लीनिक हैं क्या उनके पास प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का प्रमाण पत्र है? क्या वे बायो मेडिकल वेस्ट का निष्पादन उचित तरीके से कर रहे हैं? क्या दवाखानों में मरीजों की सुविधाओं की माकूल व्यवस्थाएं हैं? क्या चिकित्सकों के द्वारा ली जाने वाली फीस पर किसी का नियंत्रण है?

इस तरह के अनेक प्रश्न आज भी अनुत्तरित ही हैं। चिकित्सकों के द्वारा मरीज के जिस तरह से टेस्ट कराये जाते हैं और उसके बाद महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखी जाती हैं उस पर किसी का नियंत्रण नहीं है। अब तो लोग यह कहने में भी गुरेज नहीं करते हैं कि वे सिर्फ दो बातों के लिये ही कमा रहे हैं। एक बच्चों को शिक्षा देने के लिये दूसरा बीमार पड़ने पर इलाज कराने के लिये। इसमें से कुछ बच जाता है तो वह खाने पीने और पहनने ओढ़ने के काम आता है।

बहरहाल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा दिये गये आदेश को जनसंपर्क कार्यालय के जरिये विज्ञप्ति के माध्यम से मीडिया के जरिये प्रचारित करवाया गया था। इससे साफ है कि इस आदेश की प्रति स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी अधिकारी एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वरोचिष सोमवंशी एवं जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड को भी भेजी गयी होगी।

इस लिहाज से स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी अधिकारी स्वरोचिष सोमवंशी और जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड को इस मामले में स्वसंज्ञान से एक्शन लिया जाना चाहिये था। इस मामले में सिवनी के निर्दलीय विधायक दिनेश राय, काँग्रेस के विधायक रजनीश हरवंश सिंह एवं योगेंद्र सिंह सहित काँग्रेस-भाजपा के प्रवक्ताओं को मौन भी आश्चर्यजनक ही माना जायेगा।

यह सब कुछ तब हो रहा है जबकि सिवनी के एक सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते केंद्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री रहे एवं वर्तमान में जिले के प्रभारी मंत्री शरद जैन प्रदेश में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री हैं। इस उदाहरण से यही माना जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में लोगों का ध्यान आकृष्ठ करने तो आदेश जारी किये जा रहे हैं लेकिन उस पर अमल हो रहा है अथवा नहीं इस बारे में ध्यान देने की फुर्सत किसी को नहीं है।



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