मंत्री विहीन सिवनी जिला

(शरद खरे)

सिवनी जिले में सशक्त नेत्तृत्व का अभाव साफ दिखायी दे रहा है। इक्कीसवीं सदी के पहले दशक के पूर्वार्द्ध तक सिवनी जिले को प्रदेश मंत्री मण्डल में न केवल स्थान मिलता आया है वरन सिवनी से दो तीन मंत्री ही नहीं, तीन-तीन विभाग के मंत्री भी प्रदेश शासन में रहे हैं।

भाजपा शासन काल में डॉ.ढाल सिंह बिसेन सिवनी जिले के अंतिम मंत्री रहे हैं। उनके बाद से अब तक किसी को भी प्रदेश मंत्री मण्डल में स्थान नहीं मिल पाया है। एक समय था जब काबिलियत के भरोसे मंत्री पद मिला करता था। कालांतर में जोड़ तोड़ की राजनीति ने जैसे ही पैर पसारे, उसके बाद से गणेश परिक्रमा करने वालों को ही लाल बत्ती से नवाज़ा जाने लगा।

सिवनी का गौरवशाली इतिहास साक्षी है कि इस जिले ने पंडित गार्गी शंकर मिश्र, सुश्री विमला वर्मा, स्व.हरवंश सिंह, श्रीमति उर्मिला सिंह, स्व.श्रीमति प्रभा भार्गव जैसे कद्दावर मंत्री प्रदेश को दिये हैं। सुश्री विमला वर्मा के मंत्री मण्डल में रहते हुए दी गयीं सौगातें आज भी सिवनी के निवासियों के लिये अमूल्य धरोहरों से कम नहीं हैं।

विडम्बना ही कही जायेगी कि लगभग एक दशक से भी अधिक समय से सिवनी जिले में मंत्री नहीं बनाया गया है। कहने को डॉ.ढाल सिंह बिसेन और नरेश दिवाकर को पिछली बार राज्य वित्त आयोग और महाकौशल विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद से इतिहास मानो मौन ही हो गया है।

यह सच है कि अगर किसी को राज्य मंत्री मण्डल में स्थान दिया जाता है तो उस क्षेत्र का विकास अपने आप होना इसलिये भी आरंभ हो जाता है क्योंकि उसके विभाग के अधिकारी उस मंत्री के जिले में योजनाओं को न केवल लेकर आते हैं वरन उनका क्रियान्वयन भी बेहद द्रुत गति से कराते हैं।

एक दशक से ज्यादा समय से सिवनी मंत्री विहीन है। मंत्री विहीन सिवनी की पीड़ा का अंदाज़ा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि प्रदेश की योजनाओं में सिवनी की भागीदारी नगण्य ही है। प्रदेश में कितनी योजनाएं चल रही हैं पर उनकी गूंज और अनुगूंज भी सिवनी में सुनायी नहीं दे पाती है।

वर्तमान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की ओर से कमल मर्सकोले इकलौते विधायक हैं। वे दूसरी बार चुने गये हैं। इस लिहाज़ से उन्हें अनुभवी माना जा सकता है। कमल मर्सकोले को ही अगर शिवराज सिंह चौहान अपने मंत्रीमण्डल में स्थान दे देते हैं तो यह सिवनी के लिये विकास के मामले में काफी हद तक उपयुक्त माना जा सकता है।

सिवनी जिले में लगभग बारह सालों से जिले के विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया है, जबकि एक समय था जबकि जिले से एक से ज्यादा मंत्री हुआ करते थे। निश्चित तौर पर सिवनी में सियासत करने वाले नेताओं को इस बात पर आत्म मंथन करना होगा कि आखिर उनसे चूक कहाँ हुई है, जिसके चलते विधायकों को प्रदेश में मंत्री नहीं बनाया जा रहा है।



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