मक्के का दाम कम मिलने से निराश हैं किसान!

भावांतर के भंवर में फंसा अन्नदाता किसान

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। भावांतर योजना में व्याप्त कुछ विसंगतियों को तो राज्य सरकार के द्वारा दूर कर दिया गया है, किन्तु भावांतर योजना के तहत सिमरिया स्थित कृषि उपज मण्डी में किसानों के द्वारा बेची जाने वाली उपज (मक्का) का वाजिब मूल्य न मिल पाने से किसान मायूस ही दिख रहा है।

गत दिवस बादलपार में कृषि उपज मण्डी के अधीन उप मण्डी का श्रीगणेश किया गया। इस उप मण्डी में व्यापारियों के द्वारा 1385 रूपये तक की बोली लगायी गयी। वहीं सिवनी की कृषि उपज मण्डी में किसानों के मक्के को गीला, खराब या अन्य तरह की खामियां निकालकर उसकी बोली 900 रूपये से आरंभ करायी जा रही है।

किसानों का कहना है कि किसानों के प्रतिनिधि के बतौर चुने गए कृषि उपज मण्डी के सदस्यों के द्वारा भी किसानों का हित साधने की बजाय व्यापारियों का ही पक्ष लिया जा रहा है। किसानों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि बीते दिवस 600 रूपये से आरंभ हुई बोली के बाद हुए विवाद की भेंट मण्डी के सचिव सुभाष तिवारी चढ़ चुके हैं।

इसके साथ ही किसानों का कहना था कि किसानों के मक्के में नमी को मापने के लिये कृषि उपज मण्डी के पास किसी तरह का यंत्र नहीं है। व्यापारी अपना यंत्र लाकर अनाज में नमी का आंकलन करते हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें व्यापारियों के द्वारा लायी जाने वाली मशीनों पर किंचित मात्र भी ऐतबार नहीं है।

किसानों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि किसानों के हितों के संरक्षण के लिये चुने गये भारतीय जनता पार्टी और काँग्रेस समर्थित मण्डी प्रतिनिधियों के द्वारा भी किसानों के हितों में कभी आवाज बुलंद नहीं की जाती है। एक किसान का कहना था कि काँग्रेसनीत कृषि उपज मण्डी में किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ हो रहा है और प्रदेश तथा देश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी समर्थित मण्डी सदस्य पूरी तरह मौन साधे रहते हैं। इतना ही नहीं किसान हितैषी सिवनी के निर्दलीय विधायक दिनेश राय के द्वारा भी इस मामले में मण्डी के अधिकारियों की मश्कें नहीं कसे जाने से किसानों में निराशा पसर रही है।

इसी तरह किसानों का कहना है कि वे दूर-दूर से कृषि उपज मण्डी में अपना अनाज बेचने आते हैं और किसानों को चाय, पानी, भोजन आदि की सुविधाएं भी नहीं मिल पाती हैं। उल्लेखनीय होगा कि किसानों को पाँच रूपये में भरपेट भोजन कराने के लिये मण्डी मुख्यालय के द्वारा योजना का आगाज किया गया है किन्तु सिवनी की सिमरिया स्थित कृषि उपज मण्डी में दो सालों से यह योजना ठप्प पड़ी है, इसके बाद भी काँग्रेस एवं भाजपा समर्थित मण्डी सदस्य चैन की नींद सो रहे हैं।



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