मॉडल रोड की तर्ज पर जलावर्धन योजना!

बार-बार बढ़ रही समयावधि, चुनी हुई परिषद को नहीं परवाह!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। लगता है भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के लिये मॉडल रोड की तरह नवीन जलावर्धन योजना भी दुधारू गाय की तरह ही साबित हो रही है। आधी अधूरी पड़ी मॉडल रोड के लिये बार-बार समयावधि बढ़ाये जाने के बाद अब नवीन जलावर्धन योजना के लिये भी बार-बार समयावधि बढ़ाये जाने का ताना-बाना बुना जा रहा है।

नगर पालिका परिषद के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि भाजपा की राजेश त्रिवेदी के नेत्तृत्व वाली नगर पालिका परिषद के शासनकाल में ज्यारत नाके से नागपुर नाके तक के हिस्से को मॉडल रोड घोषित कर लगभग 13 करोड़ रूपये की लागत से इसका निर्माण आरंभ कराया गया था।

विडम्बना ही कही जायेगी कि राजेश त्रिवेदी के उपरांत अब श्रीमति आरती शुक्ला के नेत्तृत्व में नगर पालिका परिषद के तीन साल पूरे होने को आये हैं पर यह मॉडल रोड अभी भी आधी अधूरी ही पड़ी है। मॉडल रोड के बीच बेतरतीब डिवाईडर्स पर लगे बिजली के खंबे आज भी शोभा की सुपारी ही बने हुए हैं।

सूत्रों ने आगे बताया कि नवीन जलवार्धन योजना के कार्यादेश जारी होने के बाद तीन बार कार्य करने के लिये ठेकेदार की सुविधा से समय बढ़ाया जा चुका है। 30 मार्च 2015 को मेसर्स लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग सर्विसेज़ को कार्यादेश जारी किया गया था। इस कार्यादेश को दिये जाने को भी तीन साल पूरे होने को आ रहे हैं, पर अब तक जलावर्धन योजना का काम पूरा नहीं हो सका है।

इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि मार्च 2018 में ठेकेदार को आठ माह में कार्य पूरा करने के लिये कार्यादेश दिया गया था। इसके उपरांत दो बार ठेकेदार के द्वारा समय माँगे जाने पर उसे समय प्रदाय किया गया है। अब जबकि तीन साल बीतने को हैं और उसके बाद भी अगर ठेकेदार को काम करने के लिये समय दिया जाता है तो यह योजना भी मॉडल रोड की तरह आधी अधूरी ही रह जायेगी।

सूत्रों ने बताया कि 62 करोड़ 55 लाख रूपये की नवीन जलावर्धन योजना में ठेकेदार को अब तक 46 करोड़ (लगभग 75 फीसदी) रूपयों का भुगतान किया जा चुका है। शहर में जहाँ-तहाँ पाईप अभी भी नहीं डाले गये हैं। आधे अधूरे काम में ही अगर 75 फीसदी राशि का भुगतान भाजपा शासित नगर पालिका परिषद के द्वारा ठेकेदार को कर दिया गया है तो यह अपने आप में भ्रष्टाचार की नायाब मिसाल ही माना जा सकता है।

अपेक्षाकृत ईमानदार छवि के मुख्य नगर पालिका अधिकारी नवनीत पाण्डेय से जनापेक्षा है कि वे इस मामले में एक जाँच दल जिसमें लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं सिंचाई विभाग के तकनीकि अमलों का शुमार हो के साथ ही साथ शहर के कम से कम आधा दर्जन ईमानदार शहरियों के एक जाँच दल का गठन कर नवीन जलावर्धन योजना के काम की जाँच करवायें और अगर नियम विरूद्ध तरीके से काम कराया गया है या ठेकेदार के द्वारा जबरन ही काम में हीला हवाला किया गया है तो उसे काली सूची में डालने की कार्यवाही करते हुए उससे विलंब एवं सड़क आदि की तोड़फोड़ के लिये हर्जाना वसूलने की कार्यवाही की जाये।



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