मौत के बाद उसे समझ बैठे नई दुल्हन

(विजय सिंह राजपूत)

इंदौर (साई)। 15 साल पहले ब्याही महिला को नई दुल्हन समझ पोस्टमार्टम करवाया गया। उम्र गलत लिखाने के कारण परिजन कागजी कार्रवाई से लेकर पोस्टमार्टम तक परेशान होते रहे। नवविवाहित का केस मान लेने से मामला एसडीएम तक पहुंच गया।

पुलिस के अनुसार बुधवार शाम शाजापुर के अकोदिया गांव में रहने वाली 35 वर्षीय नफीसा पति इकबाल मंसूरी को परिजन जली हालत में एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। दूर के रिश्तेदार जाकिर ने नफीसा की उम्र 25 साल बता दी।

अस्पताल प्रबंधन ने मान लिया कि मौत नवविवाहिता की हुई है। इसके बाद कागजी कार्रवाई और पोस्टमार्टम में मामला उलझ गया। भाई इमरान ने बताया कि एमवाय अस्पताल में ताऊ के बेटे जाकिर ने उम्र गलत लिखवा दी थी। हमने उम्र में सुधार करने की बात कही तो अस्पताल प्रबंधन नहीं माना, जबकि शाजापुर में एसडीएम ने नफीसा के मृत्युपूर्व बयान में उम्र का उल्लेख भी किया था।

तहसीलदारों की हड़ताल से भी हुई परेशानी

एमवाय अस्पताल प्रबंधन ने पोस्टमार्टम कराने के लिए तहसीलदार से संपर्क किया। तहसीलदारों की हड़ताल होने से वह उपलब्ध नहीं हो पाए। ऐसी स्थिति में पोस्टमार्टम में लेटलतीफी होती रही। एसडीएम शालिनी श्रीवास्तव के अस्पताल पहुंचने के बाद शाम को नफीसा का पोस्टमार्टम हो पाया। परिजन का कहना है कि समय पर पोस्टमार्टम हो जाता तो रात से पहले हम शाजापुर पहुंच जाते। देरी के कारण गांव में परिवार, रिश्तेदार व रहवासी परेशान होते रहे। परिजन के मुताबिक नफीसा और इकबाल का निकाह 2002 में हुआ था।

इनके दो बेटे व दो बेटी है। नफीसा का मायका आगर जिले के बसिया गांव मे हैं। 18 दिन पहले घर के बाहर नफीसा कचरा जला रही थी तब उसका दुपट्टा आग की चपेट में आ गया। पहले उसे शाजापुर के अस्पताल में भर्ती किया था। बाद में इंदौर रैफर किया गया।

सात साल तक महिला को मानते हैं नवविवाहिता

कानूनी प्रावधान के अनुसार शादी के सात साल तक महिला को नवविवाहिता माना जाता है। इन सालों में महिला की असामान्य या संदिग्ध मौत होती है तो तहसीलदार केस की जांच करते हैं। उम्र के गफलत में एसडीएम को आना पड़ा।



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