ये रहे इस साल विवाह के मुहूर्त

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। बारिश के बीच भी शादी की शहनाईयों की गूंज जारी है। शादियों का यह सिलसिला तीन जुलाई को थम सकता है।

रिमझिम फुहारों का दौर चल रहा है। फुहारों के बीच बेंड बाजों और शहनाई की गूंज भी सुनायी दे रही है। हालांकि शहनाई की यह गूंज ज्यादा दिनों की नहीं है। 03 जुलाई से इस पर लम्बा विराम लगने जा रहा है। कर्क की संक्राति और चातुर्मास की शुरूआत के साथ शादियों का सिलसिला थम जायेगा। इसके बाद नवंबर में देवोत्थानी एकादशी के बाद ही सात-फेरों की वैदिक रस्म का क्रम शुरू होगा जो निरंतर चलता रहेगा। शादियों की धूम फिर शुरु हो जायेगी।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वैदिक विवाह पद्धाति में विवाह की रस्म के लिये गुरु और शुक्र ग्रह का तारामंडल में विराजमान होना आवश्यक है। सूर्य की संक्राति का भी इसमें विशेष ध्यान रखा जाता है। फिलहाल गुरु व शुक्र ग्रह तो अपने स्थान पर बने हुए हैं, लेकिन जुलाई में कर्क की संक्राति शुरू हो रही है।

इसी तरह ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसलिये भड़ली नवमीं से विवाहों पर ब्रेक लग जायेगा। अभी 30 जून के अलावा 01, 0203 जुलाई का मुहूर्त ही शेष बचा है। भड़ली नवमीं 02 जुलाई को है, लेकिन प्रभाव 03 जुलाई तक बरकरार रहेगा, इसलिये 03 जुलाई तक सात फेरों की रस्म निभायी जा सकती है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शादियों को चातुर्मास से भी जोड़कर देखा जाता है। सामान्यतः चातुर्मास व्रत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी से दीपावली के बाद आने वाली देवोत्थानी एकादशी तक चलता है। इस बार देवशयनी एकादशी 04 जुलाई को पड़ रही है। देवोत्थानी एकादशी 31 अक्टूबर हो है।

इसी तरह ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य के मकर रेखा में प्रवेश के बाद वैवाहिक मुहूर्त शुरू होते हैं। मकर संक्राति मिथुन की संक्राति यानी सूर्य के मिथुन राशि में रहने तक प्रायः विवाह मुहूर्त रहते हैं। सूर्य जैसे ही कर्क राशि में आता है, विवाह मुहूर्तांे पर विराम लग जाता है।

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि पाणिग्रहण संस्कार में गुरु और शुक्र ग्रह का भी विशेष महत्व है। तारामंडल में इनकी मौजूदगी के दौरान ही शादियां होती हैं। गुरू और शुक्र ग्रह के अस्त के बाद शादियां नहीं होतीं। ऐसा माना जाता है कि सुखी दाम्पत्य के लिये देव गुरु ब्रहस्पति का आशीष और उनकी तारामंडल में उपस्थिति जरूरी है। इसी तरह संतान व भौतिक सुख के लिये शुक्र ग्रह का होना आवश्यक है। फिलहाल दोनों ग्रह तो तारामंडल में हैं, लेकिन कर्क की संक्राति और चातुर्मास के कारण शादियों पर विराम लग रहा है।

चार माह के विराम के बाद शादियों का मुहूर्त नवंबर में शुरू होगा। शादियां 11 नवंबर से शुरू हो जायेंगी, लेकिन इसके विशेष मुहूर्त अगहन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर 19 नवंबर से शुरू होंगे। इसके बाद खर मास का थोड़ा विराम लगेगा और मार्च 2018 के बाद तक शादियों की धूम बनी रहेगी।



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