रिसोट्स में धड़ल्ले से चल रहा देह व्यापार!

बिना पहचान पत्र घण्टे दो घण्टे को आसानी से उपलब्ध हैं कमरे!

(स्पेशल ब्यूरो)

सिवनी (साई)। घुमंतू ब्रितानी पत्रकार रूडयार्ड किपलिंग के सुप्रसिद्ध उपन्यास द जंगल बुक के मशहूर किरदार मोगली की कथित कर्मभूमि पेंच नेशनल पार्क में बने रिसोटर््स में देह व्यापार के धड़ल्ले से चलने की खबरें अब तेज हो रहीं हैं। कहा जा रहा है कि बिना पहचान पत्र के ही यहाँ घण्टे दो घण्टे या चौबीस घण्टों के लिये कमरे आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।

कुरई पुलिस सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पेंच में बने रिसोर्ट्स में सीजन के दौरान तो बुकिंग अमूमन फुल ही रहती है। सूत्रों ने बताया कि जब पेंच नेशनल पार्क बंद हो जाता है उसके बाद इन रिसोर्ट्स में वीरानी छा जाती है। इस दौरान सिवनी सहित नागपुर एवं अन्य शहरों के शौकीन लोगों के द्वारा इन रिसोटर््स में जाकर मौज मस्ती की जाती है।

सूत्रों ने कहा कि बारिश के समय पेंच के रिसोटर््स अय्याशी का अड्डा बन जाते हैं। यहाँ आने वाले आगंतुकों का न तो वहाँ की पंजी (रजिस्टर) में ही कोई रिकॉर्ड रखा जाता है और न ही इसकी जानकारी नियमित तौर पर कुरई पुलिस को दी जाती है कि रिसोर्ट में कौन आकर रूक रहे हैं।

इसके साथ ही सूत्रों ने बताया कि पूर्व में पुलिस के द्वारा कुछ रिसोर्ट के कमरों से क्रिकेट सट्टा चलने की जानकारी मिलने पर वहाँ छापा मारकर कुछ सटोरियों को धर दबोचा गया था, इतना ही नहीं पुलिस के छापे की सूचना क्रिकेट सट्टा खिलाने वालों को मिलने पर वे साजो सामान छोड़कर वहाँ से नौ – दो – ग्यारह भी हो चुके हैं।

सूत्रों ने बताया कि हाल ही में जिला मुख्यालय में हुए गैंग रेप के मामले में पेंच के एक रिसोर्ट पर भी इसकी आंच आयी है। कहा जा रहा है कि पेंच के एक रिसोर्ट में भी किसी आरोपी के द्वारा पीड़िता को लेकर जाया गया था। सूत्रों ने कहा कि पेंच के उस रिसोर्ट में किसने, किसके नाम पर कमरा बुक कराया था? किसके नाम का पहचान पत्र जमा कराया गया था? सीसीटीवी फुटेज में कौन-कौन दृष्टव्य हो रहे हैं, इस बारे में शायद ही कोई जानता हो।

इसी तरह सूत्रों ने कहा कि दरअसल, पेंच में जितने भी रिसोर्ट्स हैं उनमें से अधिकांश बहुत बड़े समूहों या नामी गिरामी लोगों के हैं। इनके मालिक या प्रबंधन के उच्च स्तरीय लोग यहाँ साल में एक बार भी आने की जहमत नहीं उठाते हैं। इस लिहाज से पेंच के रिसोटर््स में बैठे स्थानीय प्रबंधकों के द्वारा मनमानी की जाकर बिना पहचान पत्र की छाया प्रति जमा कराये ही यहाँ आगंतुकों को रूकने के लिये कमरे प्रदाय कर दिये जाते हैं। जब कभी भी असावधानी के चलते कोई घटना, दुर्घटना में बदल जाती है तब इस तरह के मामलों का खुलासा होता है।

सूत्रों ने कहा कि पेंच में बने रिसोटर््स के सीसीटीवी फुटेज की अगर जाँच की जाये और उस समय वहाँ रूकने वालों की तादाद देखी जाये तो आश्चर्यजनक खुलासा हो सकता है। सूत्रों ने कहा कि आसपास के शहरों के लिये पेंच में बने रिसोटर््स संदिग्ध गतिविधियों के लिये मुफीद स्थल बनकर रह गये हैं।

अभी हम जबलपुर मेें हैं, आने के बाद ही बता पायेंगे कि इस मामले में अद्यतन स्थिति क्या है. 25 नवंबर को हुए बलात्कार के मामले की जाँच जारी है. जाँच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा.

एस.एन.पाठक,

एसडीओपी सिवनी.



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