लखनादौन में अवैध क्रॅशर!

(शरद खरे)

सिवनी जिले में अवैध क्रॅशर चल रहे हैं। आदिवासी बाहुल्य लखनादौन विकासखण्ड के एक गाँव में तो सारी वर्जनाओं को तार-तार कर दिया गया है। लखनादौन से नरसिंहपुर मार्ग पर कसई गाँव में लगा क्रॅशर और डामर प्लांट देखकर लगता है कि सिवनी में नियम कायदों को बलाए ताक पर रखकर ही काम किया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्ग अथवा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की सड़कों से ढाई सौ मीटर की परिधि में किसी तरह की गतिविधियों को संचालित नहीं किया जा सकता है जिससे आवागमन प्रभावित हो। कमोबेश यही नियम वन भूमि के हैं। वन विभाग की भूमि से भी लगभग ढाई सौ मीटर की परिधि में किसी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता है।

कसई ग्राम में लगा क्रॅशर देखकर लगता है कि इसका सामने वाला हिस्सा सड़क को मानो छू रहा हो। वहीं, पीछे वाला हिस्सा वन विभाग की सीमा को छू रहा है। देखा जाये तो क्रॅशर की अनुमति के देने के बाद खनिज विभाग की यह जवाबदेही होती है कि वह इस बात को अवश्य ही देखे कि जिस रकबे के लिये अनुमति ली गयी है उस पर क्रॅशर लगाया गया है अथवा नहीं।

इसके साथ ही साथ क्रॅशर की संस्थापना के आरंभ से संस्थापना तक यह भी आवश्यक होता है कि समय-समय पर खनिज विभाग के अधिकारी क्रॅशर के स्थान का मौका मुआयना भी करें। साथ ही साथ यह स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों का भी दायित्व माना जायेगा कि वे भी जाकर इस बात को देखें कि काम नियमानुसार हो रहा है अथवा नियमों को बलाए ताक पर रखकर।

इस मामले में जवाबदेही एनएचएआई के अधिकारियों की भी पूरी-पूरी बनती है। एनएचएआई के पास तो बकायदा हाईवे पेट्रोल के नाम पर एक वाहन भी होता है जिसका काम ही रास्ते पर घूम-घूमकर व्यवस्थाएं बनाने का है। विडम्बना ही कही जायेगी कि इस तरह का वाहन अपने मूल दायित्व को छोड़कर दीगर बेगार के कामों में समय जाया करता दिखता है।

दरअसल, कसई ग्राम में सड़क किनारे संस्थापित क्रॅशर एवं डामर प्लांट से उड़ने वाली डस्ट और धंुए के कारण यहाँ सड़क पर दृश्यता बेहद कम हो जाती है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कम दृश्यता में दिन और विशेषकर रात के समय वाहन चालकों को वाहन चलाने में बहुत ही ज्यादा असुविधा का सामना करना पड़ता है।

इसी तरह से सिवनी से लखनादौन और लखनादौन तथा धूमा के बीच अनेक स्थानों पर सड़क से ढाई सौ मीटर से भी कम के दायरे में निर्माण कार्य किये गये हैं जो किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जा सकता है। जिला प्रशासन को चाहिये कि अगर इस तरह का कोई नियम विरूद्ध काम किया जा रहा है तो खनिज विभाग को इसके लिये पाबंद किया जाये।

संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड से जनापेक्षा है कि वे इस दिशा में स्वसंज्ञान से पहल कर कदम उठायेंगे, इसके  साथ ही साथ अनुविभागीय राजस्व अधिकारी लखनादौन को भी चाहिये कि क्षेत्र में अगर इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं तो उन्हें बंद कराकर इस तरह के गलत काम करने वालों को दण्डित किया जाना चाहिये।



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