वकील रहेंगे आज कार्य से विरत!

(प्रदीप माथुर)

छिंदवाड़ा (साई)। बार कौंसिल ऑफ इंडिया के आह्वान पर पूरे देश के अधिवक्ता 31 मार्च को अपने न्यायालयीन काम नहीं करंेगे। बार काउंसिल लॉ कमीशन की केंद्र सरकार को दी सिफारिशों का विरोध कर रही है। राज्य अधिवक्ता परिषदों के अधिकारों को खत्म करने और उन्हें पंगु बनाने का आरोप लगाते हुए इसका विरोध देश की सभी स्टेट बार काउंसिल कर रहीं हैं।

मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के अध्यक्ष गंगा प्रसाद तिवारी ने मंगलवार को एक प्रेसवार्ता में जानकारी देते हुए इस बिल का विरोध किया और आगामी आंदोलन के बारे में बताया। इस दौरान जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रमोहन मुदगल, पूर्व सचिव प्रणय नामदेव आदि मौजूद रहे।

वरिष्ठ अधिवक्ता श्री तिवारी ने बताया कि 31 मार्च को देश के लगभग 20 लाख वकील विरोध स्परूप न्यायालयों में काम करने नहीं पहुंचेंगे और प्रतिवाद दिवस मनायेंगे। उन्होंने बताया कि आठ अप्रैल को दिल्ली में सभी राज्य अधिवक्ता परिषद और उच्च न्यायालयों के पदाधिकारी व प्रतिनिधियों की बैठक है। इसमें आगामी रणनीति बनायी जायेगी।

श्री तिवारी ने बताया कि लॉ कमीशन ने केंद्र सरकार को एडव्होकेट बिल 2017 दिया है इसमें 1961 में बने एक्ट में बदलाव की सिफारिश है। अभी धारा 35 के अंतर्गत राज्य परिषद को अधिवक्ताओं के किसी व्यावसायिक कदाचरण पर कार्यवाही करने का अधिकार है।

नये बिल में एक आयोग बनाने की सिफारिश की गयी है। इस तरह राज्य परिषद की शक्तियों को खत्म करने प्रयास हो रहा है। अब लगातार दो बार से अधिक चुनाव जीतने के बाद बार काउंसिल का चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रस्ताव भी है। उन्होंने बताया कि यह अलोकतांत्रिक व निर्वाचित संस्था के अधिकारों का हनन है।

सिवनी बार काऊंसिल के अध्यक्ष मुकेश अवधिया ने बताया कि 31 मार्च को सिवनी में भी अधिवक्ता कार्य से विरत रहेंगे।



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