वाहन टूट रहे बेतरतीब गति अवरोधकों से!

 

मानक आधार पर नहीं बने शहर के गति अवरोधक

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिला मुख्यालय सहित जिले भर में मनमाने तरीके से बनाये गये गति अवरोधकों के कारण दुपहिया और चार पहिया वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इस मामले में जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशों पर भी स्थानीय निकाय, लोक कर्म विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सहित एनएचएआई भी ध्यान नहीं दे रहा है।

जिला मुख्यालय में एसपी बंग्ले से जीएडी कॉलोनी को जोड़ने वाले मार्ग पर बने दो गति अवरोधकों से टकराकर अनेक वाहन नीचे की ओर से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसकी शिकायत बार-बार किये जाने पर भी कोई कार्यवाही न होना आश्चर्य का ही विषय माना जा रहा है। ये अतिक्रमण लोगों को पहाड़ के मानिंद ही नजर आ रहे हैं। वहीं, चौक-चौराहों पर जहाँ गति अवरोधक होना चाहिये वहाँ गति अवरोधक ही नहीं हैं।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि 19 सितंबर 2013 को जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी पत्र क्रमाँक पुअसि/ एसी/ जीबी/ 926-ए/ 2013 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की परियोजना क्रियान्वयन ईकाई 01 एवं 02 को स्पष्ट निर्देश देकर गति अवरोधकों के बारे में गाईड लाईन जारी की गयी थी।

सूत्रों ने आगे बताया कि पुलिस मुख्यालय में यातायात महानिदेशक संचालनालय के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के 14 सितंबर 2013 के पत्र क्रमाँक पुमु/ अमनि/ याता.संचा/ सेल/ 2646/ 13 के संदर्भ में कहा था कि माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा जनहित याचिका नंबर 9045/ 06 में सड़कों पर बनाये जाने वाले गति अवरोधकों (स्पीड ब्रेकर) के संबंध में निर्देश दिये गये हैं।

पत्र में कहा गया है कि संबंधित पुलिस अधीक्षक के क्षेत्र में जितने भी गति अवरोधक बने हैं, उनका परीक्षण करवाया जाये कि क्या वे गति अवरोधक इंडियन रोड्स काँग्रेस द्वारा बनाये गये मानकों के आधार पर बनाये गये हैं? अगर नहीं बने हैं तो उन्हें तत्काल ही संबंधित विभाग जो सड़क के लिये जिम्मेवार हैं (पीडब्ल्यूडी, नगर पालिका, एनएचएआई इत्यादि) से मिलकर हटवाया जाये एवं अगर आवश्यक है तो उनके स्थान पर इंडियन रोड्स काँग्रेस के मानकों के आधार पर गति अवरोधक बनवाये जायें।

पत्र में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया है कि भविष्य में (16 सितंबर 2013 के उपरांत) जो भी गति अवरोधक बनवाये जाते हैं, उन्हें इंडियन रोड्स काँग्रेस के मानकों के आधार पर ही बनवाया जाये। गति अवरोधक जहाँ भी बनाये जायें, उसके दोनों ओर उपर्युक्त चेतावनी बोर्ड भी लगाये जायें (एसपी बंग्ले से जीएडी कॉलोनी वाले मार्ग पर चेतावनी बोर्ड नहीं हैं)। इतना ही नहीं गति अवरोधक पर दृष्यता बढ़ाने के लिये काले सफेद पेंट (ल्यूमिनस) से पट्टियां बनवायी जायें अथवा केट्स आई भी लगायी जायें।

इस पत्र की कंडिका नंबर-6 में साफ तौर पर कहा गया है कि पुलिस अधीक्षक ही सुनिश्चित करेंगे कि बिना पुलिस की अनुमति के कोई गति अवरोधक न बनाया जाये। पत्र में कहा गया है कि मध्य प्रदेश मोटर यान अधिनियम 1994 के नियम 219 के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट, जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति, पुलिस अधीक्षक और स्थानीय निकायों के परामर्श से सार्वजनिक सड़क के उपर्युक्त स्थानों पर ऐसे गति अवरोधकों का निर्माण कराया जा सकेगा जैसा अखिल भारतीय सड़क अनुसंधान संस्थान द्वारा समय-समय पर अनुमोदित किया गया हो।

गौरतलब होगा कि स्पष्ट निर्देशों के एक लंबे अंतराल के बाद भी सिवनी जिले विशेषकर जिला मुखयलय के गति अवरोधकों के बारे में न तो पुलिस ने ही कोई संज्ञान लिया है और न ही संबंधित विभागों ने, जिसके परिणाम स्वरूप वाहन स्वामियों को नुकसान ही झेलना पड़ रहा है।



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