विशेष टिप्पणी

नया साल, नये संकल्प

(लिमटी खरे)

वैसे तो भारत गणराज्य में नया साल गुड़ी पड़वा के दिन आता है, पर अंग्रेजी नया साल आने को है। सालों साल के बदलाव और पाश्चात्य संस्कृति के पीछे भागने का यही हश्र सामने आना था कि हम अपनी मूल संस्कृति को तजकर पाश्चात्य संस्कृति को अंगीकार करते जा रहे हैं। आज भारत वर्ष में गुड़ी पड़वा की बजाय अंग्रेजी नये साल को ही नव वर्ष का आगाज माना जाने लगा है। बहरहाल, अंग्रेजी नया साल ही सही, इसमें कुछ नये संकल्प लिये जायें और उन्हें पूरा करने की दिशा में सार्थक प्रयास किये जायें तो यह वाकई सिवनी के लिये राहत की ही बात मानी जायेगी। नये साल में नये संकल्प लेकर ही हम एक कदम आगे दो कदम पीछे की तर्ज पर होने वाले सिवनी के विकास के पिछड़ेपन को काफी हद तक दूर कर सकते हैं।

सिवनी जिला औद्योगिक दृष्टि से बेहद पिछड़ चुका है। एक समय था जब सिवनी में राजाधिराज इंडस्ट्रीज, साबू केमिकल्स, क्रिसेंट एलॉयंस जैसे उद्योग हुआ करते थे। राजनैतिक दिशाहीनता के चलते एक के बाद एक सभी सिवनी से रूठकर बंद हो गये। इसके बाद सिवनी में उद्योग के मामले में एक शून्यता आ गयी। पिछले कुछ सालों में सिवनी में भुरकुलखापा में एक नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित होता दिख रहा है। सिवनी में एक नहीं तीन-तीन पॉवर प्लांट्स के एमओयू हुए। एक की संस्थापना का काम जोर-शोर से चल रहा था, पर वह भी अब ठण्डे बस्ते की ओर दिख रहा है। यह बहुत आवश्यक है कि सिवनी को औद्योगिक दृष्टि से बेहद सशक्त बना दिया जाये। उद्योगों के अभाव में सिवनी का विकास अवरूद्ध हो रहा है, यह बात किसी से छुपी नहीं है। समाजशास्त्र में औद्योगीकरण और नगरीकरण को एक दूसरे का पर्याय माना गया है। अगर उद्योग धंधे स्थापित होंगे तो निश्चित तौर पर यहाँ नगरों की बसाहट बढ़ेगी। नगरों की बसाहट बढ़ेगी तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधनों में इजाफा होगा, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।

इसके अलावा सिवनी में सालों साल माँग करने के बाद भी अब ब्रॉडगेज का सपना साकार होता दिख रहा है। यह कब पूरा होगा यह तो भविष्य के गर्त में ही है। एक नयी परियोजना जो रामटेक से गोटेगाँव की रेल लाईन थी, वह भी परवान चढ़ती नहीं दिख रही है। सिवनी का यह सौभाग्य रहा है कि यह उस मार्ग पर अवस्थित है जिसे देश के सबसे लंबे और व्यस्ततम राष्ट्रीय राजमार्ग होने का गौरव प्राप्त है। सिवनी का यह सौभाग्य रहा कि यहाँ से होकर स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के अंग उत्तर-दक्षिण गलियारा जा रहा था, जिस पर वर्ष 2008 में संकट के बादल छाने लगे थे। इसके लिये आंदोलन भी हुए और कानूनी लड़ाई भी लड़ी गयी। विडंबना ही कही जायेगी कि 2017 के समाप्त होने के बाद भी कुरई घाट में नये निर्माण का काम आरंभ नहीं हो सका है। सिवनी के सांसद-विधायक भी शायद उन्हें मिले जनादेश का मान नहीं रख पा रहे हैं।

सिवनी में चिकित्सा सुविधाएं किसी से छुपी नहीं हैं। आज लोग चिकित्सा सुविधाओं के लिये नागपुर पर ही निर्भर हैं। बात-बात पर जिला चिकित्सालय से मरीजों को नागपुर रिफर कर दिया जाता है। क्या यही है आजादी के बाद साढ़े छः दशकों का विकास? जाहिर है नहीं। सिवनी में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा की दूरंदेशी के चलते एक मिनी मेडिकल कॉलेज की अर्हताएं पूरी करने वाला जिला चिकित्सालय सत्तर के दशक की समाप्ति के साथ ही मिल चुका था। दो मेडिकल कॉलेज के आने की बात कही जा रही थी पर एक मेडिकल कॉलेज भी सिवनी की झोली में आता नहीं दिखा। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं कि अगर यह स्थिति बन रही है तो जाहिर सी बात है कि यह राजनैतिक नेत्तृत्व की नपुंसकता ही मानी जायेगी। जिस जनता ने उन सांसद-विधायकों पर विश्वास कर उन्हें अपना भाग्य विधाता चुना है, क्या अब उनका दायित्व नहीं है कि वे जनादेश का सम्मान करें?

रही बात शिक्षा के क्षेत्र की तो शिक्षा के क्षेत्र में सिवनी में निजि स्तर पर अनेक संस्थाएं संचालित हो रही हैं। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इन संस्थानों में पालकों की जेब तबियत से काटी जा रही है। मामला चाहे शालाओं का हो या महाविद्यालयों का, सरकारी स्तर पर अध्ययन-अध्यापन का स्तर क्या है, यह बात आज के पालक बेहतर समझ सकते हैं। आज जरूरत है कि पालकों की जेबों को देखकर यहाँ बेहतर स्तर की शिक्षण संस्थाओं को खोलने के मार्ग प्रशस्त किये जायें और जो स्तरहीन शिक्षा आज प्रदाय की जा रही है, वह भी महंगी दरों पर, उसे रोकने के इंतजामात किये जायें।

जिले के अखबार रोजाना ही भ्रष्टाचार की खबरों से अटे पड़े रहते हैं। नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार की गंध अब सड़ांध में तब्दील हो चुकी है। कबीर वार्ड में चार साल पहले बनायी गयी पानी की टंकी आज भी इसलिये रीती रहती है क्योंकि इसको बनाने के पहले यह विचार नहीं किया गया कि इसे भरा कहाँ से जायेगा? यही आलम नवीन जलावर्धन योजना का है। सारा शहर चेचक के मानिंद खुदा पड़ा है। शहर में नवीन जलावर्धन योजना की पाईप लाईन बिछायी जा रही है।

सिवनी जिले के विकास के लिये यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि अभी तो यहाँ विकास की पहली किरण भी शायद नहीं पड़ी है। हमें सुव्यवस्थित विकास के लिये एक ठोस कार्य योजना तैयार करना बेहद जरूरी है। आज लोग हमें क्या करना है, कौन झंझट में पड़े, कौन पंगा ले आदि मुहावरों का प्रयोग कर अपनी जवाबदेही से बचते दिख रहे हैं। हमें जागना ही होगा और सिवनी को विकास की पटरी पर लाकर उसे द्रुत गति से दौड़ाना ही होगा, हमें यह विचार भी करना होगा कि हमारी आने वाली पीढ़ी को हम क्या देकर जा रहे हैं? क्या इससे हमारी आने वाली पीढ़ी संतुष्ट होगी और वह हमें माफ कर पायेगी . . .?



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