शहर में असुरक्षित बालाएं!

(शरद खरे)

जिला मुख्यालय में छेड़छाड़ की घटनाओं में इजाफा होना चिंता का विषय है। हाल ही में बारापत्थर के हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी एवं राजपूत कॉलोनी में छेड़छाड़ की दो घटनाएं प्रकाश में आयी हैं। दोनों ही घटनाएं एक ही तरह की प्रतीत हो रही हैं। शाम ढलते ही शहर में अगर कमसिन बालाएं असुरक्षित हो जायें तो हाकिमों पर उंगली उठना स्वाभाविक ही है।

शहर का बारापत्थर क्षेत्र इन दिनों कोचिंग हब में तब्दील हो गया है। भोर होने से रात ढलने तक बारापत्थर में सिवनी के निर्दलीय विधायक दिनेश राय, पूर्व मंत्री डॉ.ढाल सिंह बिसेन, पुलिस अधीक्षक निवास के आसपास संचालित होने वालीं कोचिंग क्लासेस में छात्र-छात्राओं का आना-जाना लगा रहता है।

मिशन उच्चतर माध्यमिक शाला से लेकर बाहुबली चौक होकर कोचिंग संस्थाओं में आने-जाने वाली छात्राओं को कमोबेश हर दिन ही मनचलों के द्वारा फिकरे कसे जाते हैं। इतना ही नहीं अनेक छात्राओं के आगे-पीछे तो मनचलों की फौज भी आती-जाती देखी जा सकती है।

यह माना जा सकता है कि शर्म, संकोच और लोक लाज लिहाज, सामाजिक वर्जनाओं के चलते अनेक छात्राओं के द्वारा तो इस तरह की छेड़छाड़ की शिकायत न तो परिजनों से की जाती है और न ही अन्य किसी से की जाती है। गौर करने वाली बात तो यह है कि अगर कोई बुजुर्ग सभ्रांत इन आताताई मनचलों को रोकने की कोशिश करता है तो ये मनचले गाली गलौच और मारपीट पर भी आमादा हो जाते हैं।

इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिये निर्भया मोबाईल शहर में डीजल-पेट्रोल फूंकती ही नजर आती है। पता नहीं निर्भया मोबाईल कहाँ और किसकी निगरानी में लगी रहती है। होना यह चाहिये कि कोतवाली पुलिस के द्वारा मिशन स्कूल से बाहुबली चौराहा होते हुए कोचिंग संस्थाओं तक पैदल गश्त करवायी जाये।

इसके अलावा कोचिंग संस्थाओं में पढ़ने जाने वाले विद्यार्थियों को संस्था संचालकों के द्वारा परिचय पत्र जारी किये जाने चाहिये, इन परिचय पत्रों की समय-समय पर पुलिस के द्वारा भी सड़कों पर जाँच की जानी चाहिये ताकि आवारागर्दी करने वाले शोहदों की नकेल कसी जा सके।

शहर में छात्राएं असुरक्षित हैं और महिला हितों का दावा करने वाले गैर राजनैतिक संगठनों के साथ ही साथ काँग्रेस-भाजपा के महिला विंग भी मौन धारित किये हुए हैं। देश-विदेश में महिलाओं के साथ होने वाली अनैतिक घटनाओं के लिये तो सभी केंडल मार्च से लेकर विज्ञप्तियों की बौछार कर दी जाती हैं पर स्थानीय मामलों की बारी आते ही सब मौन हो जाते हैं।

संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड एवं जिला पुलिस अधीक्षक तरूण नायक से जनापेक्षा है कि इस मामले में वे ही स्वसंज्ञान से कोतवाली पुलिस को कार्यवाही हेतु निर्देशित करें ताकि छात्राएं बिना किसी भय के कोचिंग संस्थाओं और शालाओं में अध्ययन करने आ-जा सकें।



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