शहर में ट्रामा केयर की ओटी

(शरद खरे)

सिवनी का नेत्तृत्व करने वाले सांसद-विधायकों, विपक्षी दलों के लिये यह शर्म की ही बात मानी जा सकती है कि जिले में दुर्घटनाओं की तादाद में हो रही बढ़ौत्तरी और इनमें काल कलवित होने वाले लोगों की जानकारी से रोजाना ही समाचार पत्रों के पटे होने के बाद भी सात सालों बाद भी जिले में एक भी ट्रामा केयर यूनिट की स्थापना नहीं हो सकी है।

भारतीय राष्ट्रीय सड़क प्राधिकरण (एनएचएआई) के द्वारा जिले में कराये जा रहे फोरलेन निर्माण में सिवनी शहर के नये बायपास  पर ट्रामा केयर यूनिट का निर्माण कराया जाना चाहिये था। विडम्बना ही कही जायेगी कि 2017 मेें भी अब तक जिले में एक भी ट्रामा केयर यूनिट अस्तित्व में नहीं है।

तत्कालीन जिला कलेक्टर भरत यादव के द्वारा जिला मुख्यालय में इंदिरा गाँधी जिला चिकित्सालय में ट्रामा केयर में ऑपरेशन थियेटर को आरंभ कराने की पहल आरंभ की गयी थी, पर यह भी परवान चढ़ती नहीं दिख रही है।

देखा जाये तो यह कार्य एनएचएआई को वर्ष 2010 में इसे आरंभ कराया जाना चाहिये था। विडम्बना ही कही जायेगी कि एनएचएआई सहित सांसदों ने भी इस दिशा में प्रयास नहीं किये। सिवनी में सड़क के लिये आंदोलन करने वाले संगठनों के द्वारा भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की गयी जिसका नतीजा था कि लोग घायल होते रहे, काल कलवित होते रहे पर, किसी ने इस दिशा में प्रयास करना ही मुनासिब नहीं समझा।

इस सड़क पर न जाने कितने निर्दोष लोग अब तक दम तोड़ चुके हैं न जाने, कितने घायलों को नागपुर या जबलपुर जाकर आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ा है। यह जवाबदेही सरकार की है कि वह अपनी रियाया को निःशुल्क चिकित्सा ही मुहैया कराये। यह दुःख का ही विषय है कि हुक्मरानों ने इस दिशा में प्रयास करने की जहमत ही नहीं उठायी।

एनएचएआई के द्वारा सिवनी से खवासा के सड़क भाग का निर्माण करा रही मेसर्स सदभाव इंजीनियरिंग कंपनी के साथ जो अनुबंध किया गया था उसमें, सिवनी बायपास पर इसका निर्माण कराया जाना प्रस्तावित था। इसके लिये बकायदा जमीन भी चिन्हित कर ली गयी थी। इसका निर्माण क्यों नहीं कराया गया इसके लिये सांसदों को लोकसभा में प्रश्न करना चाहिये था पर, सात साल बीतने को हैं किन्तु किसी एक ने भी इस मामले को लोकसभा में गुंजायमान नहीं किया है।

राज्य शासन के द्वारा जिला चिकित्सालय में ट्रामा केयर यूनिट के लिये भवन का निर्माण तो करा दिया गया है किन्तु, इसके लिये आवश्यक चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती के मामले में वह अब तक मौन है। जिले के चार विधायक दिनेश राय, कमल मर्सकोले, रजनीश हरवंश सिंह एवं योगेंद्र सिंह भी इस मामले में मूक दर्शक ही बने बैठे हैं। रही बात जिले के दोनों संसद सदस्यों फग्गन सिंह कुलस्ते और बोध सिंह भगत की तो मानो उन्हें भी जिले से कोई लेना-देना नहीं है।

संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड से जनापेक्षा है कि वे ही इस मामले में स्वसंज्ञान से एनएचएआई को इस बारे में पाबंद करें कि जल्द से जल्द सिवनी शहर के बायपास पर (जहाँ ट्रामा केयर यूनिट के लिये जगह भी आवंटित हो चुकी है) ट्रामा केयर यूनिट की संस्थापना की जाये। जब तक वहाँ ट्रामा केयर आरंभ हो तब तक जिला चिकित्सालय के ट्रामा केयर यूनिट को आरंभ कराया जाये।



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