संकरी सड़कें और पालिका प्रशासन!

(शरद खरे)

जिला मुख्यालय में सड़कों की चौड़ाई क्या होना चाहिये और सड़कों की चौड़ाई वास्तव में क्या है? इस बारे में न तो किसी को चिंता है और न ही कोई चिंता करना चाह रहा है। यातायात के बढ़ते दबाव के बाद आये दिन सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं में आपसी विवाद और घायलों की तादाद में इजाफा हो रहा है पर प्रशासन के कदम देखकर प्रतीत होता है कि प्रशासन नीरो के मानिंद ही चैन की बंसी बजा रहा है।

गुजरे जमाने में, सिवनी शहर को दो भागों में विभक्त करने वाली नेहरू रोड (अब शहर का विस्तार हो जाने पर इसे विभाजक सड़क शायद नहीं कहा जा सकता है) पर दिन में दो पहिया वाहन चलाना बेहद कठिन काम ही है। इस सड़क पर दोनों ओर दुकानें हैं तथा दुकानों में आने वाले ग्राहकों के द्वारा सड़क पर वाहन खड़े किये जाने से यहाँ जब चाहे तब यातायात अवरूद्ध हो जाता है।

यह एक बानगी है सिवनी शहर की यातायात व्यवस्था की। शहर में ज्यारत नाका से छिंदवाड़ा चौराहे तक के मॉडल रोड के हिस्से में भी वाहन चलाना आसान नहीं है। मॉडल रोड का निर्माण चार सालों से लगातार जारी है। सड़क पर दोनों ओर अतिक्रमण पसरा हुआ है।

गाँधी भवन से गणेश चौक होकर बरघाट नाका जाने वाले मार्ग के हाल भी बेहाल हैं। इस सड़क पर अगर दो यात्री बस एक साथ निकल जायें तो यातायात की स्थिति देखते ही बनती है। इस सड़क का उपयोग सरकारी कार्यालयों के लिये आने-जाने के लिये तो किया ही जाता है साथ ही इस सड़क पर से विद्यार्थी भी बहुतायत में ही आया-जाया करते हैं। कटंगी नाका से दीवान महल पहुँच मार्ग के आलम भी कमोबेश यही हैं। भैरोगंज के अंदरूनी मार्ग भी संकरे ही माने जा सकते हैं।

मजे की बात यह है कि बस स्टैण्ड से विभिन्न दिशाओं में जाने वाले यात्री वाहन बस स्टैण्ड से छिंदवाड़ा चौक, गाँधी भवन होकर ज्यारत नाका, गाँधी भवन से बरघाट नाका, भैरोगंज आदि होकर गुजरते हैं। इन सभी सड़कों पर शैक्षणिक संस्थान भी स्थित हैं। इसके बाद भी नगर पालिका प्रशासन के साथ ही साथ यातायात पुलिस, परिवहन विभाग एवं जिला प्रशासन के द्वारा अब तक इन मार्गोंं पर यातायात सुव्यवस्थित करने की मुहिम न छेड़ा जाना आश्चर्य का ही विषय माना जायेगा।

पता नहीं नगर पालिका प्रशासन किस जरूरी काम में उलझा है कि उसे शहर की सड़कों पर पसरा अतिक्रमण दिखायी नहीं देता है। जिस तन्मयता के साथ कचहरी चौक का अतिक्रमण हटाया गया था उसी संजीदगी के साथ मॉडल रोड को अतिक्रमण मुक्त क्यों नहीं कराया जा रहा है।

आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि जनता के चुने हुए नुमाईंदे भी इस तरह के अतिक्रमण के मामले में पूरी तरह से मौन अख्तियार किये रहते हैं। हालात देखकर यही प्रतीत होता है कि चुने हुए प्रतिनिधियों ने भी शहर की सड़कों के चौड़ीकरण और उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराने के काम को अपने दायित्वों से पृथक कर दिया है।

होना यह चाहिये कि जिला प्रशासन, सांसद और विधायकों के द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी से इस बात की जानकारी ली जाये कि कौन सी सड़क कितनी चौड़ी है और वाकई में दिन के वक्त वह कितनी चौड़ी रह जाती है? इसके साथ ही साथ प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी और राजस्व विभाग के साथ संयुक्त रूप से बैठक कर सड़कों से अतिक्रमण हटाने की समय सीमा तय कर कार्यवाही को अंजाम दिया जाना चाहिये।



26 Views.

Related News

(शरद खरे) समाज शास्त्र में औद्योगीकरण और नगरीकरण को एक दूसरे का पर्याय माना गया है। औद्योगीकरण जहाँ होगा वहाँ.
मौसम में बदलाव का दौर है जारी (महेश रावलानी) सिवनी (साई)। मकर संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तरायण होने के.
रतजगा करते हुए कर रहे वोल्टेज बढ़ने का इंतजार (अय्यूब कुरैशी) सिवनी (साई)। लगातार दो तीन वर्षों से अतिवृष्टि और.
(ब्यूरो कार्यालय) सिवनी (साई)। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर द्वारा सी.एम. हेल्पलाइन में की गयी शिकायत को.
राजेंद्र नेमा ने स्वामी नारायणानंद के द्वारा शंकराचार्य लिखे जाने पर माँगे प्रमाण (ब्यूरो कार्यालय) सिवनी (साई)। भगवत्पाद आद्यशंकराचार्य द्वारा.
आठ फीसदी ब्लो पर हुई निविदा स्वीकृत, भेजा शासन को अनुमोदन के लिये (अखिलेश दुबे) सिवनी (साई)। अटल बिहारी वाजपेयी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *