सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई हुई ठप्प!

55 करोड़ का रूका ईपेमेंट!

(सोनल सूर्यवंशी)

भोपाल (साई)। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को मुफ्त दवाएं देने के लिए स्वास्थ्य महकमे के मैदानी अफसरों ने ई-औषधि साफ्टवेयर से खरीदी तो कर ली, लेकिन उसका भुगतान करना भूल गए, लिहाजा कई सप्लायरों ने दवाओं व अन्य चिकित्सकीय सामग्री की सप्लाई रोक दी जिससे अब मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

दरअसल जिला अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों के लिए दवा और अन्य चिकित्सकीय सामग्री खरीदी के लिए विभाग द्वारा सिविल सर्जन और सीएमएचओ को ई-औषधि साफ्टवेयर के माध्यम से खरीदी के अधिकार दिए गए हैं। इसके लिए उन्हें ऑनलाइन आर्डर करना होते हैं और इसी प्रणाली के माध्यम से भुगतान करना होता है।

खरीदी करने के बाद यह अफसर ई-भुगतान करना भूल गए। इससे दवाओं और सामग्री की सप्लाई लगभग बंद हो गई है। गौरतलब है कि ई-औषधि साफ्टवेयर के माध्यम से खरीदी की व्यवस्था को हुए एक साल से ज्यादा समय हो गया इसके बावजूद अधिकारियों और उनके स्टाफ इस प्रणाली को नहीं समझ सके हैं।

जिले के अधिकारी साफ्टवेयर के माध्यम से दवाएं और सर्जिकल एवं अन्य सामग्री खरीदने के लिए आर्डर लगातार जारी कर रहे हैं। साफ्टवेयर ने यह खरीदी आदेश जेनरेट कर संबंधित कंपनियों को भेज दिया है। इतना करने के बाद अधिकारियों ने ई-भुगतान नहीं किया है। इससे कुछ सप्लायर्स ने जहां सप्लाई नहीं दी है वहीं कुछ ने सप्लाई देकर बिल भेज दिया।

लापरवाही के चलते नहीं हो पाता बजट का उपयोग : ऐसी लापरवाही के कारण ही शासन द्वारा जिलों को उपलब्ध कराए गए बजट का उपयोग नहीं हो पाता। ऐसे में शासन तो बजट उपलब्ध करा देता है लेकिन तकनीकी गड़बडिय़ों के चलते उसका उपयोग नहीं हो पाता और आखिरकार यह सरेंडर हो जाता है। वहीं मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदना पड़ती है।

55 करोड़ का बकाया है भुगतान : पूरे प्रदेश में इस लापरवाही के चलते शासन के ऊपर 55 करोड़ की उधारी हो गई है। इसमें से एनएचएम का 43 करोड़ 95 लाख और स्वास्थ्य विभाग का 11 करोड़ रुपए बकाया हो गया है। स्वास्थ्य संचालनालय में अतिरिक्त संचालक वित्त डॉ. राजीव सक्सेना के अनुसार सभी जिलों के सीएमएचओ और सिविल सर्जन को निर्देश दिए गए हैं कि ई-औषधि पर दिए गए आर्डन का ई-भुगतान सुनिश्चित करें यदि शासन पर तय दायित्व रहा तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी। अभी दवाओं के साथ सफाई सुरक्षा बायोमेडिकल वेस्ट आदि की कई उधारियां 2 से 3 साल पुरानी भी है।



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