सरकारी योजनाओं का विधिवत क्रियान्वयन न करा पाना सरकार की चूक : डॉ.प्रमोद राय

(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। समय – समय पर विभिन्न सामाजिक धार्मिक संगठनों तथा स्वयं सरकार के द्वारा देशी नस्ल की गाय पालने के लिये योजनाएं चलायी जाती हैं। देशी नस्लों में प्रायः साहिवाल, थारपारकर, गौरी, नागौरी, सुरही इत्यादि गाये हैं। साथ ही इनकी वंश वृद्धि के लिये सरकार द्वारा खूब प्रचार – प्रसार भी किया जाता है और समय – समय पर प्रतियोगिताएं आयोजित कर गौ पालकों का मनोबल बढ़ाने की योजनाएं बनायी जाती हैं।
उक्ताशय की बात पूर्व जिला पंचायत सदस्य किसान नेता डॉ.प्रमोद राय द्वारा कही गयी है। उन्होंने कहा कि उप संचालक पशु चिकित्सा विभाग की निष्क्रियता के चलते योजनाओं का विधिवत क्रियान्वयन नहीं हो पाता है। वर्तमान समय में जब सरकार द्वारा प्रदेश व्यापी गोपाल पुरूस्कार योजना के माध्यम से पशु मेलों का आयोजन किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में प्रचार – प्रसार के अभाव में इन योजनाओं का लाभ पशु पालकों को नहीं मिल पाता है और योजनाएं कागजों में सिमट कर रह जाती हैं।
डॉ.प्रमोद राय ने कहा कि इतना ही नहीं वर्तमान समय में वंश वृद्धि हेतु सरकारी पशु चिकित्सा विभाग एवं पशु औषधालय में कृत्रिम गर्भाधान हेतु देशी नस्ल की सीड्स अर्थात सीमेन उपलब्ध ही नहीं हैं, केवल जर्सी एवं होलिस्टन फ्रीजियन सीमेन उपलब्ध हैं। कहा जाता है कि होलिस्टन एवं जर्सी नस्ल की गायों का दूध स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है फिर भी सरकार देशी नस्ल का सीमेन अर्थात सीड्स उपलब्ध नहीं करा पा रही है।
उन्होंने कहा कि पुराणों में भी गाय को माता माना गया है। ऋषि-मुनि भी स्वयं अन्य माध्यमों से गौ पालनेे की तथा गौ सेवा करने की एवं गौशाला इत्यादि चलाने की सलाह देते हैं। स्वयं जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज (शारदा एवं द्वारिका पीठाधीश्वर) किसी प्राण प्रतिष्ठित मंदिर में पूजन अर्चन, दर्शन, अनुष्ठान उपरांत सर्वप्रथम गौ माता के दर्शन के बाद ही मंचासीन होते हैं एवं अपने अनुयायियों से मिलते हैं।
डॉ.राय ने आगे कहा कि इतना अधिक महत्व है गौमाता का, लेकिन सरकारी तंत्र केवल और केवल रस्म अदायगी करता है, यह अत्यंत अफसोस का विषय है। सरकार द्वारा गौ संवर्धन एवं संरक्षण बोर्ड बना दिया गया है जिसके अध्यक्ष महंत अखिलेश्वरानंद महाराज हैं किन्तु उनको भी इस विभाग में संपूर्ण नियंत्रण नहीं दिया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में चलित पशु औषधालय भी चलाये जाते हैं जिनके पास कोई भी दवा मुफ्त वितरण हेतु उपलब्ध नहीं रहती है। क्या कारण है कि देशी नस्ल की सीमन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है? सालभर में आवश्यक दवा भी उपलब्ध नहीं करायी जाती है? कृत्रिम गर्भाधान सफल नहीं हो पाते हैं? जबकि प्रायः देखने में आया है कि एक – एक गाय को 06 से 07 बार भी कृत्रिम गर्भाधान करने के बाद सफलता नहीं मिल पा रही है?
डॉ.प्रमोद राय ने आरोप लगाया कि उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाओं कार्यालय का फोन नंबर 07692 – 220535 कभी उठता ही नहीं है। क्या फोन खराब है? या उस कार्यालय के अधिकारी के अधीनस्थ कर्मचारी कार्यालय में अनुपस्थित रहते हैं? उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा विभाग आम उपभोक्ता की देखरेख चर्चा या पहुँच से दूर रहता है।
उन्होंने कहा कि इस विभाग में लंबे समय से एक-एक स्थान पर जमे हुए, अधिकारी – कर्मचारी या चिकित्सक का स्थानांतरण किया जाना चाहिये। विभाग का ऑडिट कराया जाये। इसके साथ ही ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाये ताकि ज्ञात हो सके कि प्रत्येक वर्ष में कितनी गायें कृत्रिम गर्भाधान से लाभांवित हुईं। उनके द्वारा उत्पन्न बछड़े – बछड़ियों की संख्या क्या है? पशुपालकों की संख्या क्या है? इसके साथ ही डॉ.राय ने पशुपालकों का नाम एवं ग्राम सार्वजानिक किये जाने की माँग की।



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