सस्ता हो सकता है रेस्तरां में खाना खाना!

(पुरबाली हजारिका)

गुवहाटी (साई)। जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक गुरुवार को गुवाहाटी में शुरू हुई। परिषद शुक्रवार को एकमुश्त कर योजना में कर राहत के साथ एसी-गैर एसी रेस्तरां पर टैक्स दरें घटाने का फैसला ले सकती है। इससे रेस्तरां में खाना खाना सस्ता हो जाएगा। परिषद 28 प्रतिशत की उच्चतम कर स्लैब से करीब 80 फीसदी वस्तुओं को बाहर करने पर और जीएसटी रिटर्न एक की जगह तीन माह में भरने जैसे निर्णयों पर भी मुहर लगा सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, परिषद जीएसटी लागू के तीन माह के परिणामों पर भी गौर करेगी। खासकर लघु उद्योगों पर इसके प्रभावों, एमआरपी को लेकर शिकायतों पर ध्यान दिया जाएगा। बैठक में एकमुश्त कर योजना में एक समान कर, तमाम वस्तुओं पर कर घटाने, रिटर्न में आसानी से जुड़ी तीन समितियों की सिफारिशों पर फैसला लेना है। जीएसटी के दायरे में अभी 1200 के करीब वस्तुएं और सेवाएं हैं।

उल्लेखनीय है कि असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी, जिसे एकमुश्त कर योजना, एसी-गैर एसी रेस्तरां और तमाम वस्तुओं पर टैक्स दरों की समीक्षा करनी थी। फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन के अध्यक्ष गरीश ओबेराय की अध्यक्षता में एक दल गुरुवार को राजस्व सचिव हसमुख अधिया से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने सभी रेस्तरां पर एकसमान 12 फीसदी कर की मांग की है। अगर इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया तो एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी राहत होगी।

छोटे कारोबारियों पर एक फीसदी कर हो : समिति ने एकमुश्त योजना के तहत, व्यापारियों, मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) और रेस्तरां पर टैक्स एक फीसदी करने की सिफारिश की है, अभी यह क्रमशः एक, दो और पांच फीसदी है। एक करोड़ टर्नओवर वाले एकमुश्त योजना का लाभ उठा सकते हैं। व्यापारियों के लिए समिति ने कहा है कि कर मुक्त वस्तुओं की बिक्री अलग रखने वाले व्यापारियों पर एकमुश्त योजना के तहत एक फीसदी टैक्स लिया जाए। जबकि जो व्यापारी कर मुक्त और कर दायरे वाली वस्तुओं के टर्नओवर पर एक साथ टैक्स चाहते हैं, उन पर 0.5 फीसदी टैक्स हो।

एसी-गैर एसी रेस्तरां पर 12 फीसदी कर लगे : समिति ने एकमुश्त कर योजना से बाहर के एसी और गैर एसी रेस्तरां में कर का अंतर खत्म करने को भी कहा है। दोनों पर ही एकसमान 12 फीसदी कर का सुझाव दिया गया है। अभी गैर एसी रेस्तरां पर 18 फीसदी टैक्स है। इस योजना के कारोबारियों को अंतरराज्यीय व्यापार की भी अनुमति दी जा सकती है।

लग्जरी होटलों पर भी कर बोझ कम होगा : समिति का कहना है कि 7500 से ज्यादा किराये के कमरे वाले होटलों में खाने-पीने पर 18 फीसदी टैक्स लगना चाहिए। इसमें पांच सितारा और अन्य होटलों में भेद नहीं हो। पांच सितारा होटलों पर अभी 28 फीसदी टैक्स है।

28 फीसदी टैक्स स्लैब से दो तिहाई वस्तुएं बाहर होंगी : सूत्रों के अनुसार, 28 फीसदी की स्लैब में अभी 227 वस्तुएं हैं, जिनमें से 118 को 18 प्रतिशत की कर स्लैब में लाया जा सकता है। इससे उच्चतम टैक्स स्लैब में सिर्फ 62 वस्तुएं रह जाएंगी। चॉकलेट, तंबाकू उत्पाद , पान मसाला, फ्रिज, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, डिजिटल कैमरा आदि शामिल हैं। राज्यों की मांगों को देखते हुए कई वस्तुओं पर टैक्स को 18 से घटाकर 12 फीसदी पर भी लाया जा सकता है।

इन वस्तुओं के दाम घटेंगे : पाइप व अन्य प्लास्टिक उत्पाद, हस्तनिर्मित फर्नीचर, रोजमर्रा के उत्पाद जैसे शैंपू आदि।

हर माह की जगह तीन माह में रिटर्न भरना होगा! : करदाताओं की आसानी के लिए परिषद हर माह तीन रिटर्न भरने की कवायद पर भी पुनर्विचार कर रही है। व्यापारी जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-2 में खरीद और आपूर्ति के बीच मिलान न होने जैसी कठिनाइयों से परेशान हैं। इस कारण रिटर्न को तिमाही किया जा सकता है। अभी सिर्फ एकमुश्त स्कीम या 1.5 करोड़ टर्नओवर वालों को यह लाभ मिला है। अगस्त में 58 फीसदी की तुलना में सितंबर में 46.4 फीसदी के रिटर्न भरने से सरकार चिंतित है और व्यापारियों की समस्याएं जानने के लिए सर्वे करा रही है।



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