सिवनी में नहीं होती इलेक्ट्रॉनिक तराजुओं की जाँच!

मीडिया में इन दिनों आबकारी विभाग, यातायात विभाग और परिवहन विभाग के साथ ही साथ जिला चिकित्सालय सिवनी में जमकर सुर्खियों में हैं। सुर्खियों में रहने का कारण इनकी कोई उपलब्धि नहीं बल्कि कामचोरी ज्यादा है। इनके बीच में एक विभाग चुपचाप बैठा हुआ मुस्कुरा रहा है कि उसके ऊपर किसी की नजर अब तक नहीं गयी है, और यह विभाग है नाप-तौल विभाग।

सिवनी में आश्चर्यजनक रूप से सरकारी तंत्र पूरी तरह से पटरी से उतर चुका है। सिवनी के दोनों सांसद सिवनी को छोड़कर मण्डला और बालाघाट में अपना-अपना ध्यान लगाये हुए हैं लेकिन सिवनी के चारों विधायक पता नहीं किस काम में व्यस्त हैं कि उन्हें पटरी से उतरा हुआ सरकारी तंत्र नहीं दिखायी दे रहा है।

इस स्थिति का फायदा सिवनी में नाप-तौल विभाग भी उठा रहा है। नाप-तौल विभाग की निष्क्रियता के चलते कई व्यापारियों के ठाठ हैं। अनाज आदि के साथ ही और भी सामग्री दिये जाते वक्त उसकी तुलाई में कई व्यापारियों के द्वारा जमकर घालमेल किया जा रहा है। ऐसे व्यापारियों की इस तरह की चतुराई पूर्ण बेईमानी का सबसे ज्यादा खामियाजा ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों को उठाना पड़ रहा है।

दुकान में यदि कोई वस्तु एक किलो तुलवायी जाये तो वह घर में 900-950 ग्राम ही निकलती है। बाजार से घर तक आने में 50-100 ग्राम वस्तु आखिर कहाँ गायब हो जाती है ये बात उस ग्राहक को समझ में नहीं आ पाती है जिसके द्वारा सामग्री का क्रय किया गया है। निश्चित रूप से ग्राहक जिस दुकान पर गया था वहाँ व्यापारी ने हाथ की सफाई के साथ तुलाई में जादू दिखाया होगा। हालांकि कई दुकानों में आजकल इलेक्ट्रॉनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन उन मशीनों की जाँच करने की जहमत अभी तक किसी के भी द्वारा नहीं उठायी गयी है। संबंधित विभाग की निष्क्रियता के चलते कई व्यापारियों ने अपने इलेक्ट्रॉनिक मीटर्स को, अपने-अपने हिसाब से सेट करके रखा हुआ है।

सिवनी में तो कबाड़ी भी लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली के चलते जमकर मुनाफा कमा रहे हैं। शहर में घूम-घूम कर रद्दी आदि बटोरने वाले लगभग 80 प्रतिशत कबाड़ियों के तराजू एक विशेष प्रकार से डिजाईन किये गये होते हैं। इन तराजुओं में एक तरफ बाँट रखकर दूसरी तरफ कितनी भी सामग्री चढ़ा दी जाये.. काँटा तो कबाड़ी की मर्जी से ही झुकता है। ये कबाड़ी एक किलो के स्थान पर डेढ़-डेढ़ किलो तक रद्दी आदि बटोर ले जाते हैं।

संबंधित विभागों को चाहिये कि वे अपनी जिम्मेदारियों को समझें और शहर में नाप-तौल में गड़बड़ी करके कई व्यापारियों के द्वारा जो मुनाफा कमाते हुए लोगों को आर्थिक नुकसान पहुँचाया जा रहा है उस पर लगाम लगायी जाये। इसके लिये आवश्यक है कि तराजुओं की (जिनमें इलेक्ट्रॉनिक मीटर भी शामिल हैं) जाँच किये जाने का अभियान चलाया जाये और जो भी दोषी पाया जाये उस पर आवश्यक कड़ी कार्यवाही की जाये।

विक्रमादित्य पानिस्कर


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