सुलग गया है मुकेश बाबू के तबादले का विवाद

सीएमओ नवनीत पाण्डेय गये अवकाश पर, पार्षदों ने फाड़ा नोटिस बोर्ड पर चस्पा आदेश!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। बुधवार की शाम मुख्य नगर पालिका अधिकारी नवनीत पाण्डेय के द्वारा जारी नौ लिपिकों के स्थानांतरण आदेश का मामला अब सुलगता दिख रहा है। भाजपा के पार्षदों का इस मामले में किनारा करने पर अब काँग्रेस के सहयोग से अध्यक्ष के द्वारा आदेश निरस्त करने की कवायद की जा रही है।

नगर पालिका के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिस तरह से भाजपा शासित नगर पालिका परिषद में भाजपा के पार्षदों को ही उपेक्षित रखा जा रहा था उससे भाजपा के जीते हुए पार्षदों के अंदर रोष और असंतोष का लावा खदबदाता दिख रहा था।

सूत्रों ने बताया कि बुधवार को स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद जलकार्य शाखा से हटाये गये मुकेश चौहान की बहाली के लिये पालिका अध्यक्ष सहित कुछ (उंगलियों में गिने जाने वाले, जिनमें काँग्रेस के पार्षदों की तादाद ज्यादा थी) पार्षदों के द्वारा मुकेश चौहान के पक्ष में माहौल बनाना आरंभ कर दिया गया।

इस मामले में सूत्रों की मानें तो जब यह बात सामने आने लगी कि एक अदने से सहायक ग्रेड तीन के तबादले को सत्ताधारी दल के पालिका के कुछ नुमाईंदों द्वारा प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाये जाने से भाजपा की भद्द इसलिये पिट रही है क्योंकि जलकार्य विभाग में वर्तमान में 62 करोड़ 55 लाख की योजना पर काम चल रहा है और इस योजना में कमीशन बाजी की चर्चाएं जोरों पर हैं।

सूत्रों ने बताया कि इस बात के सामने आते ही मुकेश चौहान को वापस लाने के लिये लामबंद पालिका के प्रतिनिधियों ने अपना स्टैण्ड बदलते हुए इस बात को कहना आरंभ किया गया कि सीएमओ नवनीत पाण्डेय के द्वारा बाबुओं की अदला बदली के पहले अध्यक्ष या परिषद को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया।

इसके साथ ही सूत्रों ने कहा कि बुधवार की शाम जारी हुए नौ लिपिकों के स्थानांतरण से सत्तर फीसदी कर्मचारी खुश हैं। पालिका के अंदर चल रही चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाये तो एक लिपिक के स्थानांतरण पर इतना बवाल आखिर क्यों हो रहा है? इस मामले में सिवनी के वर्तमान एवं पूर्व विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष आदि खामोश क्यों हैं!

सूत्रों का कहना है कि अब यह मामला और भी उलझता दिख रहा है। इस मामले में पालिका अध्यक्ष के द्वारा मुकेश चौहान को हटाने की बात जब भाजपा के जिला अध्यक्ष के समक्ष उठी थी तब त्यागपत्र देने की बात भी कह दी गयी थी। पालिका में चल रही चर्चाओं के अनुसार अब यह मामला जिला कलेक्टर के समक्ष पहुँच चुका है।

इस मामले में सूत्रों ने आगे बताया कि भारतीय जनता पार्टी के कमोबेश नब्बे फीसदी पार्षदों के द्वारा भारतीय जनता पार्टी संगठन को अपनी मंशा से आवगत करा दिया गया है कि वे नवनीत पाण्डेय के इस कदम के साथ हैं और सहायक ग्रेड तीन के एक कर्मचारी की सीट बदलने को प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाया जाना चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि नगर पालिका में शाम को पालिका अध्यक्ष के कक्ष में श्रीमति आरती शुक्ला की उपस्थिति में पालिका उपाध्यक्ष परसू साहू, जलकार्य समिति के सभापति अल्केश रजक, लोक निर्माण समिति के सभापति मनू चंद सोनी सहित काँग्रेस के लगभग आधा दर्जन पार्षदों के सामने मुख्य नगर पालिका अधिकारी नवनीत पाण्डेय से जब अध्यक्ष ने उक्त स्थानांतरण आदेश को निरस्त करने की बात कही तो सीएमओ ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि यह उनके (सीएमओ के) अधिकार क्षेत्र का मामला है और वे इसे निरस्त नहीं करेंगे।

इसके बाद सूत्रों ने बताया कि यह मामला जिला कलेक्टर के पास जा पहुँचा। ज्ञातव्य है कि जिला कलेक्टर लगभग आधा दर्जन नगर निगम में पदस्थ रह चुके हैं इसलिये वे स्थानीय निकायों में इस तरह की टकराहट से भली भांति परिचित ही होंगे। इस मामले में देर रात तक क्या हुआ इस बात की जानकारी नहीं मिल सकी।

उधर, नगर पालिका के सूत्रों ने आगे बताया कि इस पूरे मामले में सालों से जड़ें जमाये बैठे लिपिकों के तबादले के बाद इस तरह की दबाव की राजनीति के चलते मुख्य नगर पालिका अधिकारी नवनीत पाण्डेय अवकाश पर चले गये हैं। सूत्रों ने बताया कि वे कम से कम एक सप्ताह बाद ही वापस लौटेंगे। उधर, पूर्व में प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी रहे गजेंद्र पाण्डेय शुक्रवार को शहर पहुँचेगे। संभावना व्यक्त की जा रही है कि गजेंद्र पाण्डेय को सीएमओ का प्रभार कुछ दिनों के लिये दिया जा सकता है और उन पर इस तबादला आदेश को निरस्त करने का दबाव बनाया जा सकता है।



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