हाथों से करें बुजुर्गों के चरण स्पर्श, ये होते हैं फायदे

बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की भारतीय संस्कृति अब दिखाई नहीं देती। एक समय दोनों हाथों से चरण स्पर्श करके बुजुर्गों को मान-सम्मान दिया जाता था लेकिन अब युवा महज औपचारिकता निभा रहे हैं। चरण छूना तो दूर प्रणाम की मुद्रा में झुकना भी गवारा नहीं है।

पैर छूने की परंपरा अब पायलागूकी बोली तक सिमट गई है। पैर छूने की परंपरा खत्म होते देखकर समाज के बुजुर्गों की चिंता बढ़ गई है। कुछ समाज में शिविर लगाकर बच्चों को संस्कार सिखाने की कोशिशें की जा रही है।

बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण करना जरूरी

साधु, संतों को तो हर कोई आदर, मान-सम्मान देता है लेकिन घर के बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की भारतीय परंपरा को खत्म होने से बचाना जरूरी है। यदि बच्चों के दिलोदिमाग में पैर छूने के संस्कारों का बीजारोपण नहीं किया गया तो भविष्य में बच्चे माता-पिता का सम्मान नहीं करेंगे। पिछले चार के चातुर्मास में हमने बच्चों को यही प्रमुख सीख दी है कि प्रतिदिन माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी व अन्य बुजुर्गों के चरण स्पर्श करके आशीर्वाद अवश्य लें। जीवन सार्थक हो जाएगा। – जैन मुनि रमेश कुमार

गांवों में पैर छूने की परंपरा जीवित

छत्तीसगढ़ के गांवों में आज भी पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा जीवित है। गांव से शहर आने वाले लोग यदि आपस में मिलें तो चाहे सड़क पर कितनी भी भीड़ हो वे झुक कर तीन-चार बार पैर छूते हैं, उन्हें दूसरों की परवाह नहीं होती। शहर में रहने वाले पैर छूने में शर्म महसूस करते हैं। दिखावे की खातिर थोड़ा सा झुक जाते हैं किन्तु उनका हाथ बुजुर्गों के पैरों तक नहीं पहुंचता। युवाओं को चाहिए कि वे पैर छूने में ना शरमाएं। – कथा वाचक भूपाल द्विवेदी

बुजुर्गों के पैर छूने से आयु, विद्या, यश की प्राप्ति

बड़े बुजुर्गों के पैर छूने से जो आशीर्वाद मिलता है उससे आयु, विद्या, यश की प्राप्ति होती है। मन में साहस का संचार होता है। मान-सम्मान देने की भावना प्रबल होती है। बुजुर्गों के अच्छे संस्कार हमारे आचरण में आते हैं। गांवों में अभी भी ऐसे लोग हैं जो साष्टांग प्रणाम करके अथवा घुटनों के बल झुककर चरणों का स्पर्श करते हैं।- कथावाचक आचार्य नंदकुमार चौबे

अहंकार की भावना नहीं आती

किसी के आगे झुकने से अहंकार की भावना खत्म होती है। चरण स्पर्श करने का अर्थ है कि हम उसके प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं। यही भाव हमें संस्कारवान बनाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि चरण उन्हीं के छूने चाहिए जो सम्माननीय हो। दुष्कर्मी, अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का स्पर्श करने से बचना चाहिए। इससे आशीर्वाद मिलने की बजाय नकारात्मक भावना का उदय होता है। सम्मान हर किसी को दें लेकिन चरण स्पर्श उन्हीं लोगों का करें जिनका मन व दिल साफ होता है। उनका आशीर्वाद हमें आगे बढ़ने को प्रेरित करता है। – ज्योतिषाचार्य, डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे

चरण स्पर्श करने से कमर, पीठ के दर्द में राहत

जिस तरह योग करने से शरीर स्वस्थ रहता है, उसी तरह साष्टांग प्रणाम करने, घुटनों के बल बैठकर चरण छूने और झुककर चरण छूने से शरीर स्वस्थ रहता है। हड्डियां मजबूत होती है। कमर, पीठ का दर्द दूर होता है। जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है। – हास्य योग प्रशिक्षक मूलचंद शर्मा

(साई फीचर्स)



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