हेल्मेट अभियान : सतत चले कार्यवाही

(शरद खरे)

जिला मुख्यालय में दो पहिया वाहन चालकों को हेल्मेट लगाने के लिये प्रेरित करने पुलिस के द्वारा लगातार ही अभियान चलाये गये। इन अभियानों में निरंतरता के अभाव के कारण अभियान परवान नहीं चढ़ पाये। जब-जब इस तरह के अभियान चले तब-तब दो पहिया वाहन चालकों के द्वारा हेल्मेट का प्रयोग किया गया और जैसे ही पुलिस की कार्यवाही शिथिल हुई दो पहिया वाहन चालक भी पुराने ढर्रे पर ही लौटते दिखे।

शुक्रवार की शाम जिला पुलिस अधीक्षक तरूण नायक ने खुद ही सड़कों पर उतरकर हेल्मेट के लिये अभियान छेड़ा। यह सिवनी के इतिहास का संभवतः पहला ही मौका होगा जब जिला पुलिस प्रमुख खुद सड़कों पर हेल्मेेट की चेकिंग के लिये उतरे हों या अपना समय दिया हो। अमूमन पुलिस अधीक्षकों के द्वारा इस तरह के अभियान के लिये मातहतों को निर्देश भर जारी किये जाते रहे हैं।

देखा जाये तो हेल्मेट दो पहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के लिये ही है। वैसे शहर में कुछ नौजवानों के अलावा तो बाकी के कमोबश सारे वाहन चालक बहुत ही कम गति में वाहन चलाते दिखते हैं। हेल्मेट अभियान की आवश्यकता शहर से ग्रामीण अंचलों की दिशा में जाने वाले दो पहिया वाहनों में ज्यादा प्रतीत होती है, वह इसलिये क्योंकि ग्रामीण अंचलों में ही दो पहिया वाहन अधिक दुर्घटनाग्रस्त होते दिखते हैं।

शाम सात बजे से आधी रात तक अगर शहर के बाहर जाने वाले मार्ग पर ही पुलिस, यातायात पुलिस और परिवहन विभाग के द्वारा दो पहिया वाहनों में हेल्मेट चेकिंग के साथ ही ब्रीथ एनेलाईजर के जरिये यह पता किया जाये कि वाहन चालक शराब का सेवन तो नहीं किये हुए है तो दो पहिया वाहन दुर्घटनाओं और नुकसान में कमी दर्ज की जा सकती है।

इसके लिये यहाँ दिल्ली का एक उदाहरण देना लाजिमी होगा कि दिल्ली में मेट्रो रेल के चलने के डेढ़ दशक बाद भी रेल की बोगियां आज भी साफ सुथरी दिख जाती हैं। इससे उलट दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की यात्री बसों में गंदगी साफ दिखायी दे जाती है।

इन दोनों ही परिवहन सेवाओं को सीसीटीवी की जद में रखा गया है। अंतर सिर्फ अधीक्षण (सुपरविजन) का है। मेट्रो रेल में लगातार ही सुपरविजन चलता रहा है। अगर आप किसी बोगी में गंदगी करते हैं तो अगले स्टेशन पर सफाई कर्मी पहुँचकर सफाई करता है और आपका चालान भी कट सकता है, पर इस तरह की व्यवस्था डीटीसी की बस में नहीं है।

प्राचीन कहावत है कि भय बिन प्रीत नहीं होती है यहाँ चरितार्थ होती दिखती है। चालान के भय से दो पहिया वाहन चालक हेल्मेट का प्रयोग तो कर लेगा किन्तु उसे सदा ही हेल्मेट पहनने के लिये प्रेरित करने की महती आवश्यकता है। पुलिस के द्वारा की जा रही कार्यवाही सही ठहरायी जा सकती है पर इससे शायद ही लोग हेल्मेट का प्रयोग लगातार करना अपनायें।

इसके लिये जरूरी होगा कि इस तरह की मुहिम सतत रूप से चलती ही रहे तब इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। इसके लिये सबसे पहले पुलिस और सरकारी कर्मचारियों को हेल्मेट पहनने के लिये प्रेरित किया जाये ताकि यह नज़ीर बने और लोग इससे प्रेरित होकर हेल्मेट को अपनाने पर बाध्य हों।



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