हो रहा सीना छलनी . . .

(शरद खरे)

सिवनी जिले में अवैध उत्खनन के मामले चरम पर हैं। जहाँ जिसका मन आ रहा है वहाँ उसके द्वारा अवैध रूप से उत्खनन किया जा रहा है। अखबारों में इस आशय की खबरों के बाद भी खजिन विभाग और जिला प्रशासन के कानों में जूं भी नहीं रेंग पा रही है।

जिले के ग्रामीण अंचलों में रेत, मुरम पत्थरों आदि का उत्खनन जमकर हो रहा है। अखबारों में सचित्र खबरों के प्रकाशन के बाद यदा-कदा खनिज विभाग के द्वारा इस संबंध में कार्यवाही की जाकर खाना पूर्ति की जा रही है। यह काम इतने व्यापक स्तर पर हो रहा है कि बिना ऊपरी पहुँच के यह संभव प्रतीत नहीं होता है।

सिवनी में केवलारी विधानसभा के साथ ही साथ घंसौर विकासखण्ड में भी अवैध उत्खनन का काम जोरों पर जारी है। घंसौर में तो देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पॉवर लिमिटेड के द्वारा लगाये जा रहे पॉवर प्लांट में कोयले की आपूर्ति में सारे नियम कायदों को दरकिनार कर दिया गया और प्रशासन मूक दर्शक बना बैठा रहा। क्षेत्र की सड़कों के पूरी तरह धुर्रे उड़ा दिये गये। प्रशासन ने संयंत्र प्रबंधन को समय सीमा में सड़कें दुरूस्त कराने के निर्देश दिये किन्तु इन निर्देशों का पालन कराना प्रशासन मानो भूल गया।

सिवनी में रेल के अमान परिवर्तन का काम जारी है। इस काम में भी अवैध उत्खनन की शिकायतें जब-तब मिलती रहती हैं। ग्रामीण अचंलों में ऊँचे पहाड़ों को जमींदोज कर दिया गया है। इसके बाद भी खनिज विभाग की कुंभकर्णीय तंद्रा नहीं टूट सकी है।

कहने को अवैध उत्खनन रोकने के लिये जिले में खनि (खनिज विभाग) का पूरा अमला है, पर पता नहीं यह किस जरूरी काम में उलझा हुआ है कि उसे जिले में हो रहे अवैध उत्खनन को देखने और इस काम में लगे लोग, मशीनों, डंपर्स आदि को पकड़ने की फुर्सत नहीं मिल पा रही है।

आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि अखबारों की सुर्खियां बनने के बाद सांसद-विधायक सहित जिला पंचायत और स्थानीय निकायों के लोग भी इस तरह के मामलों में मौन साध लेते हैं। सियासी संगठन तो मानों इस ओर देखना ही नहीं चाहते। जिले के न जाने कितने पहाड़ जमींदोज हो चुके हैं इस तरह के उत्खनन के चलते।

रोज कहीं न कहीं अवैध उत्खनन की खबर अखबारों की सुर्खियां बनी होती हैं पर कार्यवाही नहीं होने से खनिज विभाग की ओर उंगलियां उठना स्वाभाविक ही है। अब तक प्रदेश विधान सभा या देश की संसद में भी किसी भी विधायक या सांसद के द्वारा अवैध उत्खनन की बात का न उठाया जाना भी आश्चर्यजनक ही माना जायेगा।

संवेदनशील जिला कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड से जनापेक्षा है कि इस तरह के मामले मेें वे ही स्व संज्ञान लेकर खनिज विभाग के आला अधिकारियों की मश्कें कसें ताकि जिले का छलनी होता सीना कुछ हद तक रोका जा सके।



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