सिवनी का नाम छाया अंर्तराष्ट्रीय क्षितिज पर

मोगली ने जीता ऑस्कर, पेंच को मिल सकती है ख्याति

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले के जंगलों में कथित भेड़िया बालक मोगली की कहानी देश विदेश में बच्चे – बच्चे की जुबान पर है। ब्रितानी घुमंतू पत्रकार रूडयार्ड किपलिंग द्वारा रचित द जंगल बुक के हीरो मोगली पर बने टीवी सीरियल ने जमकर सराहना बटोरी थी। अब इस पर बनी फिल्म ने विश्व के सबसे बड़े समझे जाने वाले ऑस्कर एवार्ड को जीतकर सिवनी जिले का गौरव बढ़ा दिया है।

जंगल बुक को विजुअल इफेक्ट के लिये सिनेमा जगत का सबसे बड़ा सम्मान ऑस्कर पुरस्कार मिला। हालांकि ऑस्कर की दौड़ में भारत के हाथ खाली रह गये, लेकिन जंगल बुक का नाता भारत से होने की वजह से सिने प्रेमियों में खुशी की लहर है। जंगल बुक रूडयार्ड किपलिंग की उपन्यास पर आधारित फिल्म है। इस किताब में देश के हृदय प्रदेश के सिवनी जिले के घने जंगलों का वर्णन है। इस फिल्म में भी एक बार सिवनी के नाम का उल्लेख किया गया है। इस उपन्यास में जिस जंगल को चित्रित किया गया है उसे कथित तौर पर पेंच नेशनल पार्क या मोगली लैंड के नाम से भी जाना जाता है।

उपन्यास के अनुसार सिवनी के संतबावड़ी गांव में सन 1831 में एक बालक मिला था, जिसका जीवन भेड़ियों के साथ ही शुरू हुआ था और वह उन्हीं की गुफा में रहता था। ब्रिटिश शासन के अँग्रेज अधिकारी कर्नल हेनरी विलियम स्लीमन के दस्तावेज में इसके साक्ष्य मिलते हैं। बताया जाता है कि हेनरी ने इसके बारे में लिखा भी था, जिसके बाद क्षेत्र में इसकी चर्चाएं फैलीं और इस तरह की किंवदंती बरसों बीत जाने के बाद भी अब तक ये जारी हैं।

धुमंतू पत्रकार, कवि व मशहूर लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने मोगली के जीवन को कागज पर उतारा था। किपलिंग का जन्म 30 दिसंबर 1865 को मुंबई में हुआ था। किपलिंग के माता-पिता मुंबई में ही रहा करते थे। किपलिंग ने महज 13 साल की उम्र से ही कविताएं लिखना आरंभ कर दिया था और धीरे-धीरे उनकी कविताएं लोकप्रियता के चरम पर पहुंच गयीं।

कहा जाता है कि एक बार किपलिंग को भारत की सुरम्य वादियों के बीच देश के जंगलों की सैर का मौका मिला। उसी दौरान एक फॉरेस्ट रेंजर ने किपलिंग को एक बालक के शिकार करने की क्षमताओं के बारे में बताया। जंगली जानवरों के बीच लालन – पालन होने के कारण उस बालक में यह गुण विकसित हुआ था।

बताते हैं कि इस तरह की कहानियां उस दौरान भी इस क्षेत्र और जंगल में पहले से प्रचलित थीं, जिसे सुनकर किपलिंग को यहीं से जंगली जानवरों के बीच रहने वाले उस बालक के बारे में लिखने की प्रेरणा मिली। किपलिंग ने मोगली को पहले अपनी कल्पनाओं में बसाया और फिर उसे कागज पर उकेर दिया।

पहले तो मोगली को एक सुनी-सुनायी कहानी के तौर पर जाना गया, जो किंवदंती बनी, किन्तु बाद में रूडयार्ड किपलिंग की किताब ने इसे अलग पहचान दिलायी। किपलिंग ने अपनी किताब में मोगली के मित्रों को भी शामिल किया जो जंगल में उसका परिवार थे। इनमें चमेली, भालू, सांप, अकड़ू, पकड़ू, खूंखार शेरखान आदि को भी बखूबी स्थान दिया गया है। अकड़ू, पकड़़ू, चमेली मोगली का परिवार था।

दुनियाभर में प्रसिद्ध हो चुके सिवनी के जंगलों में रहने वाले इस बालक को पहचाना तो अँग्रेज लेखक ने और इसे पहली बार फिल्माया था जापान ने। जापान में सिवनी के इस बालक के कारनामों के बारे में 1989 में एक 52 एपिसोड वाला सीरियल तैयार किया गया था। द जंगल बुक शिओन मोगली नाम से बनाये गये इस एनिमेटेड टीवी सीरियल को जब प्रसारित किया गया तो वहां हर किसी की जुबान पर पर मोगली का ही नाम था।

उस दौर में टीवी पर प्रसारित होने वाले इस सीरियल में जंगल – जंगल पता चला है चड्डी पहन कर फूल खिला है टाईटल सॉन्ग हर किसी की जुबान पर छा गया था। उस दौर में बच्चे मोगली के इस सीरियल के दीवाने हुआ करते थे।

जापान में फैली सिवनी के मोगली की लोकप्रियता भारत तक पहुंचते देर नहीं लगी और 1990 में जापान के इस सीरियल को डब कराया गया, जिसे हम सभी ने दूरदर्शन पर प्रसारित किये गये कार्टून सीरियल जंगल बुक के नाम से जाना। सिवनी के जंगल से हॉलीवुड तक पहुंचे मोगली का किरदार इस फिल्म में भी एक भारतीय मूल के बालक नील सेठी ने निभाया है।



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