शिकायतकर्त्ता को ही दे दिया एससीएन!

 

 

जनजाति कार्य विभाग में चल रहा जंगलराज!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। जनजाति कार्य विभाग में अफसरों के द्वारा चमड़े के सिक्के चलाये जाते दिख रहे हैं। आदिवासी कन्या आश्रम अधीक्षिका के पति के खिलाफ शिकायत करने पर दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस (एससीएन) जारी कर उनका तबादला ही उस आश्रम से अन्यत्र करने के आदेश जारी कर दिये गये।

जनजाति कार्य विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि अंग्रेजी भाषा वाले आदिवासी कन्या आश्रम में पदस्थ श्रीमती रामकली बरकड़े और अनुसुईया बघेल के द्वारा सहायक आयुक्त को मौखिक रूप से आश्रम अधीक्षिका के पति की हरकतों की शिकायत की गयी थी।

सूत्रों ने बताया कि इस शिकायत के बाद सहायक आयुक्त के हस्ताक्षरों से दोनों महिला कर्मियों को 03 नवंबर को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब माँगा गया था। सूत्रों ने कहा कि दोनों कर्मचारियों को किस आधार पर एससीएन जारी हुआ है इस बात की जाँच किया जाना आवश्यक है।

सूत्रों ने बताया कि इसके जवाब में रामकली बाई ने कहा था कि आश्रम अधीक्षिका के पति के द्वारा आश्रम का संचालन किया जाता है। अपने जवाब में उन्होंने कहा था कि उनसे पाँच – पाँच बोरी गेहूँ धुलवाने के अलावा अधीक्षिका के पति के द्वारा यह भी कहा जाता है कि आश्रम के अलावा उनके निवास पर जाकर भी वे काम करें, अन्यथा वे (अधीक्षिका के पति) उन्हें नौकरी नहीं करने देंगे।

सूत्रों की मानें तो इसके जवाब में रामकली बाई ने यह भी कहा था कि अधीक्षिका के पति सुबह और शाम को आश्रम में प्रवेश करते हैं और उनके द्वारा कर्मचारियों आदि का वीडियो भी आश्रम के अंदर बनाया जाता है। इसकी जानकारी अगर वे आश्रम अधीक्षिका को देतीं हैं तो अधीक्षिका के द्वारा उन्हें यह कहकर भगा दिया जाता है कि अपना काम करो, नहीं तो कहीं भी फंसा दिया जायेगा।

सूत्रों ने कहा कि सहायक आयुक्त को दोनों महिला कर्मचारियों के द्वारा मौखिक शिकायत किये जाने पर इसकी जाँच सहायक आयुक्त के द्वारा किससे करवायी गयी! जाँच में क्या निष्कर्ष निकला! दोनों कर्मचारियों को आश्रम से हटाने के आदेश क्यों दिये गये हैं इस सबकी जाँच किया जाना आवश्यक है।

सूत्रों ने कहा कि नियमानुसार कन्या आश्रम में पुरूषों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होता है। इसके बाद भी आश्रम अधीक्षिका के पति के द्वारा न केवल आश्रम में प्रवेश की शिकायतें मिलती रहतीं हैं वरन उनके द्वारा आश्रम के कामों में हस्ताक्षेप की शिकायतें भी अक्सर ही मिलती रहती हैं।

मामला हमारे संज्ञान में है. दरअसल, आश्रम अधीक्षिका और दोनों कर्मचारियों की आपस में नहीं बनती थी. इससे आये दिन विवाद की स्थिति निर्मित हो रही थी. यही कारण है कि दोनों कर्मचारियों को आश्रम से हटाकर अन्यत्र पदस्थ किया गया है.

एस.एस. मरकाम,

सहायक आयुक्त,

जनजाति कार्य विभाग.

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