धन्य है सिवनी की पावन धरा

 

 

(शरद खरे)

सिवनी को भगवान शिव की नगरी भी कहा जाता है। सिवनी जिले में ऐतिहासिक और सामरिक महत्व की अनेक चीजें हैं। सिवनी को देश-विदेश में पहचान बनवाने में सिवनी की अनेक चीजों का योगदान महत्वपूर्ण माना जा सकता है। यह अलहदा बात है कि नब्बे के दशक के उपरांत सिवनी में सियासतदारों की कमजोर इच्छा शक्ति के चलते सिवनी का विकास मानो थम सा गया है।

सिवनी जिले को देश-प्रदेश में पहचान दिलाने के लिये ब्रितानी घुमंतू पत्रकार रूडयार्ड किपलिंग की किताब द जंगल बुक के मुख्य किरदार मोगली का अहम योगदान माना जा सकता है। मोगली के नाम पर बने सीरियल ने जमकर धूम मचायी। इस पर फिल्म भी बनी जो विदेशों में भी जमकर लोकप्रिय हुई।

सिवनी की पावन धरा में मठ मंदिर जैसे सिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर के अलावा जैन मंदिर, आष्टा के मंदिर, दिघौरी स्थित विशाल स्फटिक शिवलिंग, ऐतिहासिक चर्च आदि न जाने कितने धार्मिक स्थल हैं, जिनको देखने दूर-दूर से सैलानी आते हैं। इसके अलावा पुण्य सलिला बैनगंगा का उद्गम स्थल मुण्डारा भी जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित है। इस नदी पर एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बाँध (भीमगढ़) बना हुआ है।

सिवनी की पावन धरा पर सनातन धर्म के सर्वोच्च पद पर आसीन द्विपीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वरूपानंद महाराज ने जन्म लिया। जगतगुरू को देश-विदेश में कौन नहीं जानता। देश-प्रदेश के सियासतदारों को धर्म की राह पर चलने के लिये उनके द्वारा समय-समय पर मार्गदर्शन भी दिया जाता रहा है।

सिवनी जिले के गौरव की फेहरिस्त में एक और बात जुड़ गयी है कि हाल ही में उनके शिष्य स्वामी प्रज्ञानानंद गिरी महाराज को देश के सबसे महत्वपूर्ण निरंजनी अखाड़े में पट्टाभिषेक के बाद आचार्य महामण्डलेश्वर पद पर आसीन किया गया है। यह अपने आप में बेहद अद्भुत बात है।

जगतगुरू शंकराचार्य का सिवनी जिले से अगाध प्रेम किसी से छुपा नहीं है। उनके झोतेश्वर स्थित आश्रम में संचालित अस्पताल में जिले के न जाने कितने मरीजों के नेत्र संबंधी विकारों का निःशुल्क इलाज किया गया है। सिवनी में निवास करने वाले अपने आप को धन्य मानते होंगे कि धरती के उस खण्ड में निवास करते हैं जहाँ इस तरह की विभूतियों ने जन्म लिया है।

जिले में सभी धर्म, वर्ग, समुदाय को मानने वाले निवास करते हैं। इन सभी के बीच आपसी सामंजस्य या यूँ कहें कि भाईचारा देश भर में गंगा जमुनी तहजीब का नायाब उदाहरण बन चुका है। सिवनी की शांत फिजां और अपेक्षाकृत कम प्रदूषण वाले वातावरण के कारण लोगों के मानस पटल पर सिवनी एक अलग छाप छोड़ जाता है।

इन सारी उपलब्धियों को अपने अंदर समेटने वाला सिवनी जिले का सीना गर्व से कितना चौड़ा होता होगा यह बात सिवनी के निवासी ही महसूस कर सकते हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि अनेक पर्यटन, धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सामरिक महत्व की चीजों को अपने अंदर समेटने वाले सिवनी को कुछ इस तरह विकसित किया जाये ताकि यह देश-प्रदेश के पर्यटन के नक्शे पर अपनी दमदार उपस्थित दर्ज कराये, इससे सिवनी में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सिवनी की ख्याति में दिन दूनी रात चौगुनी की बढ़ौत्तरी दर्ज की जा सकेगी।

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