आरंभ होने वाला है नया शैक्षणिक सत्र!

 

 

कॉपी-किताब, गणवेश में फिर लुटेंगे पालक!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। अप्रैल माह की एक तारीख से अनेक निजि और सरकारी शैक्षणिक संस्थाओं का नया शैक्षणिक सत्र आरंभ हो जायेगा। नये सत्र में कॉपी किताब, गणवेश के मामले में एक बार फिर पालक लुटने पर मजबूर हो जायें तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये।

सरकार के द्वारा फीस निर्धारण के मामले में हर साल की तरह इस साल भी अभी तक कुछ तय नहीं किया गया है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा हर साल इस तरह के आदेश जारी किये जाते रहे हैं कि गणवेश, कॉपी – किताब आदि सामग्री की हर स्थान पर कम से कम आठ दुकानें होना चाहिये। राज्य शिक्षा केंद्र के आदेशों का पालन सिवनी में अब तक नहीं कराया जा सका है।

इस साल भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय (डीईओ) में नये शैक्षणिक सत्र के पहले किसी तरह की सुगबुगाहट नहीं देखी जा रही है। डीईओ कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि अभी तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के द्वारा इस तरह की कोई कार्य योजना तैयार नहीं की गयी है जिससे निजि शालाओं के द्वारा पाठ्यक्रम में निजि प्रकाशकों की महंगी किताबों के स्थान पर एनसीईआरटी की सस्ती किताबें और गणवेश की लूट से पालकों को बचाया जा सके।

सूत्रों ने यह भी बताया कि चूंकि जिला शिक्षा अधिकारी की कुर्सी पर दो दो अधिकारी बैठ गये हैं और अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इनमें से किस अधिकारी के जिम्मे विभाग का नियंत्रण होगा इसलिये शिक्षा विभाग के अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की झींगा मस्ती बदस्तूर जारी है।

सूत्रों ने कहा कि सालोें से इस तरह के दिशा निर्देश राज्य शिक्षा केंद्र के जरिये जारी कर तो दिये जाते हैं पर इन निर्देशों का कितना पालन हो रहा है इस बारे में देखने सुनने की फुर्सत किसी को भी नहीं रह जाती है। इसका कारण यह है कि इस पर नियंत्रण जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को करना है पर वह इस काम को अमली जामा तभी पहना सकते हैं जबकि जिला प्रशासन या अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के द्वारा उन्हें ऐसा करने को कहा जाये।

पालकों के बीच चल रहीं चर्चाओं के अनुसार जिले में चल रहीं निजि शैक्षणिक संस्थाओं में पालकों को दुकान विशेष से ही गणवेश और कॉपी – किताबें खरीदने के लिये परोक्ष तौर पर मजबूर किया जाता है। चर्चाओं के अनुसार जब राज्य शिक्षा केंद्र के स्पष्ट आदेश हैं तो जिला प्रशासन इन आदेशों की तामीली से कतराता क्यों है?

चर्चाओं के अनुसार अगर पालकों के द्वारा शैक्षणिक सत्र के आरंभ में अप्रैल माह में ही अपने बच्चों को निर्धारित पाठ्यक्रम की कॉपी – किताबें और निर्धारित गणवेश नहीं दिलवाया जाता है तो शाला में शिक्षकों के द्वारा विद्यार्थियों को सबके सामने न केवल भला – बुरा कहा जाता है वरन उन्हें दण्ड भी दिया जाता है।

पालकों का कहना है कि संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अब तक अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट नहीं किया गया है। पालकों के अनुसार जिला कलेक्टर को चाहिये कि वे हर अनुविभाग में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को इसके लिये पाबंद करें कि शाला संचालकों और पब्लिशर्स की मनमानी में पिसते पालकों को कुछ राहत मिल सके।

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