दुर्दशा का शिकार शहर के तालाब

 

 

(शरद खरे)

सिवनी शहर में आये दिन पानी की किल्लत की खबरें सुर्खियां बनी रहती हैं। सिवनी शहर की सीमा के अंदर बबरिया, दलसाागर, पुलिस लाईन के पीछे, बुधवारी, मठ मंदिर के अलावा रेल्वे स्टेशन के सामने दो तालाब हैं। अगर देखा जाये तो सिवनी शहर पानी के मामले में बहुत ही ज्यादा समृद्ध है। आवश्यकता है तो बस साधनों के रखरखाव की।

इन आधा दर्जन से ज्यादा तालाबों में से सिर्फ और सिर्फ बबरिया तालाब का पानी ही पीने के योग्य है। शेष सारे तालाबों का पानी इस कदर गंदा है कि यहाँ मवेशियों तक को पानी पीने से गुरेज ही होगा। इनमें से सबसे गंदे तालाबों में बुधवारी तालाब को ही माना जा सकता है। उसके बाद नंबर आता है रेल्वे स्टेशन के पास के तालाबों का।

शहर की शान माने जाने वाले ऐतिहासिक दलसागर तालाब की साफ-सफाई और इसके सौंदर्यीकरण में लगभग सवा करोड़ रूपये बहाये जा चुके हैं। आज की पीढ़ी देखकर यह नहीं कह सकती है कि अभी ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जबकि इस तालाब का सौंदर्यीकरण सवा करोड़ रूपये की लागत से किया गया होगा।

दलसागर तालाब के मुहाने पर दो पहिया वाहनों से लेकर भारी वाहन सुधरते और धुलते हैं। इन वाहनों से निकलने वाला ग्रीस, ऑईल आदि दलसागर तालाब में ही जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के हिसाब से देखा जाये तो जले हुए तेल या ग्रीस का निष्पादन भी सुरक्षित तरीके से किया जाना चाहिये, किन्तु सिवनी शहर में सारे नियम कायदों की सालों से ही धज्जियां उड़ायी जाती रही हैं।

सिवनी के आधा दर्जन से ज्यादा तालाब नगर पालिका सीमा के अंदर ही आते हैं। नगर पालिका का यह नैतिक दायित्व है कि वह इन तालाबों को साफ सुथरा रखने के लिये जागरूकता अभियान चलाये। अगर इसके बाद भी किसी के द्वारा तालाब को गंदा किया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कदम उठाये जायें।

विडंबना ही कही जायेगी कि सिवनी शहर के तालाबों साहित अन्य जल स्त्रोतों को संधारित करने, इन्हें साफ सुथरा रखने में नगर पालिका को कोई दिलचस्पी नहीं दिखती है। बुधवारी तालाब में सड़ी गली सब्जी और मटन एवं मछली मार्केट की गंदगी भी उड़ेली जाती रही है।

इन तालाबों के होने से शहर में अंडर ग्राउंड वाटर लेबल बढ़ता होगा, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। इन तालाबों को अगर चारों ओर से फैंसिंग आदि लगाकर सुरक्षित कर दिया जाये तो आवारा मवेशी, सूअर, कुत्ते आदि भी इन्हें गंदा नहीं कर पायेंगे, पर इस ओर ध्यान देने की फुर्सत किसी को नहीं है।

संवेदनशील जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह से जनापेक्षा है कि कम से कम वे ही स्वसंज्ञान से इस जरूरी मसले पर ध्यान देते हुए शहर के अंदर के तालाबों को गर्मी के मौसम में खाली करवाकर इनकी तलहटी में जमा गाद को खाली करवाकर इनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़वाने के मार्ग प्रशस्त करें। इसके अलावा इन तालाबों में मिलने वाले शहर के गंदे नाले नालियों का पानी भी तालाब में न जाये, इस बारे में व्यवस्था सुनिश्चित करने की महती आवश्यकता है।

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