सिवनी में भी हैं तेल के कुंए!

जमकर हो रही ब्रांडेड तेल की पैकिंग
(अय्यूब कुरैशी)
सिवनी (साई)। सिवनी के बाजार में भी नकली खाद्य तेल की पदचाप सुनी जा रही है। खाद्य विभाग की अनदेखी के चलते सिवनी में भी छिंदवाड़ा की तर्ज पर नकली तेल को ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग में बेचे जाने की चर्चायें तेजी से चल रही हैं। इस व्यवसाय से मध्य प्रदेश के सरकारी खजाने में लाखों रूपये महीने की चपत आसानी से लगायी जा रही है।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के छिंदवाड़ा ब्यूरो से प्रदीप माथुर ने प्रशासनिक सूत्रों के हवाले से बताया कि छिंदवाड़ा में बीते साल अपमिश्रित और नकली खाद्य तेल व्यवसायियों के प्रतिष्ठानों पर छापे की कार्यवाही से हड़कंप मच गया था। सूत्रों ने बताया कि पुलिस और नायब तहसीलदार की संयुक्त कार्यवाही में पाँच लाख रूपये से अधिक मूल्य के नकली तेल को जप्त किया गया।
सिवनी के बाजार में चल रहीं चर्चाओं के अनुसार बुधवारी बाजार और शंकर मढ़िया कि आसपास ही बड़ी तादाद में तेल के टैंकर्स खाली किये जाते हैं। इस खुले तेल से ब्रांडेड कंपनियों के तेल के पाँच से पंद्रह लिटर के कंटेनर्स तैयार कर पैक बंद कर बाजार में बेचा जाता है। एक तेल व्यवसायी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी में अभी एक लिटर के पॉलीपेक की मशीन नहीं आयी है।
व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि सिवनी के बाजार में खुला तेल नागपुर और महाराष्ट्र के अन्य प्रदेशों से दो नंबर में टैंकर्स के माध्यम से पहुँच रहा है। सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि महाराष्ट्र से तेल बुलाने पर व्यापारियों को यह सस्ता पड़ता है क्योंकि सारा माल दो नंबर में ही मेटेवानी स्थित परिवहन जाँच चौकी के रास्ते आसानी से पहुँच जाता है। सूत्रों ने कहा कि महाराष्ट्र से यह तेल दो नंबर में ही आता है।
सूत्रों ने बताया कि सिवनी में सोयाबीन के नाम से बिकने वाले तेल में कॉटन (रूई) वाले तेल आदि की मिलावट की जाती है। सूत्रों की मानें तो सिवनी में बिकने वाले तेल में पाँच से पंद्रह लिटर के कंटेनर्स में इस तरह की मिलावट सबसे अधिक की जा रही है।
सूत्रों ने यह संकेत भी दिये कि इस तरह का दो नंबर का काम करने वाले व्यवसायियों द्वारा खाद्य विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, विक्रय कर विभाग आदि संबंधित विभागों को समय – समय पर पर्याप्त मात्रा में चौथ दी जाती है जिसके चलते लंबे समय से तेल के कंटेनर्स की जाँच का काम भी नहीं किया गया है।
सूत्रों की मानें तो हर माह इस तरह का लाखों लिटर तेल सिवनी के बाजार में खप रहा है। इसके चलते शासन के राजस्व को सीधे – सीधे लाखों रूपयों की क्षति का सामना तो करना ही पड़ रहा है, साथ ही साथ इस तरह के अघोषित तेल के कंुओं के चलते लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
व्यापारिक सूत्रों ने इस बात के संकेत भी दिये हैं कि एक लिटर के पाऊच में भी हेराफेरी की जा रही है। एक लिटर के पाऊच का अगर वजन करवा लिया जाये तो इसमें जितना वजन लिखा होता है यह निश्चित तौर पर उस वजन से काफी कम मात्रा में ही निकलेगा। चूँकि ग्राहकों के द्वारा पाऊच को तुलवाकर नहीं लिया जाता है इसलिये वे लुटते रहते हैं और उन्हें इसका पता भी नहीं चल पाता है

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