बोध सिंह और सुभाष पटेल के कटे टिकट

 

 

 

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। भाजपा में भोपाल, इंदौर और विदिशा सहित 11 सीटों पर उम्मीदवार को लेकर शुक्रवार को भी आम सहमति के लिए के जतन चलते रहे। केंद्रीय चुनाव समिति ने बालाघाट में बोधसिंह भगत और खरगोन सांसद सुभाष पटेल की टिकट पर कैंची चला दी।

राजगढ़ में रोडमल नागर पर पुन: भरोसा जताया गया है। बालाघाट में बोधसिंह और पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन के झगड़े में ढालसिंह बिसेन को प्रत्याशी बनाया गया है। खरगोन में अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष गजेंद्र सिंह पटेल पर दांव खेला गया है।

केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में प्रदेश की शेष 11 सीटों को लेकर मशक्कत चल रही है। भोपाल, विदिशा, खजुराहो और सागर सीट पर जातिगत समीकरण साधने की कवायद चल रही है। इंदौर और ग्वालियर सीट पर भाजपा कई सियासी समीकरणों पर मंथन कर रही है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुछ सीटों पर प्रत्याशी चयन की औपचारिकता पूरी हो चुकी है लेकिन वहां कांग्रेस के प्रत्याशी का इंतजार किया जा रहा है। इंदौर और ग्वालियर सीट को इसलिए रोका गया है, भोपाल सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की उम्मीदारी घोषित होने से भाजपा को चुनावी रणनीति में अंतिम समय बदलाव करना पड़ा।

बालाघाट में सांसद भगत एवं पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन के बीच चल रही गुटबाजी-अनबन के चलते पार्टी ने पूर्व मंत्री ढालसिंह बिसेन को प्रत्याशी घोषित किया है। गौरीशंकर बिसेन अपनी बेटी मौसम बिसेन को टिकट दिलाने के लिए लॉबिंग कर रहे थे। पूर्व सांसद नीता पटैरिया का नाम भी पार्टी के विचार में था, लेकिन जातिगत समीकरणों को देखते हुए उन्हें टिकट नहीं मिल पाया। पार्टी ने बीच का रास्ता निकालते हुए ढाल सिंह को आम सहमति के आधार पर प्रत्याशी घोषित कर दिया।

उधर, खरगोन सांसद सुभाष पटेल को निष्क्रियता भारी पड़ी, हालांकि गजेंद्र सिंह पटेल के नाम पर भाजपा कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह नजर नहीं आया। भाजपा इसके पूर्व पटेल को नगर पालिका और विधानसभा चुनाव में भी आजमाया था लेकिन वह जीत दर्ज नहीं करा पाए थे। पूर्व मंत्री अंतर सिंह आर्य विधानसभा चुनाव हार चुके थे इसलिए पार्टी के पास सीमित विकल्प ही थे।

राजगढ़ में मौजूदा सांसद रोड़मल नागर पर पार्टी ने दोबारा भरोसा जताया है। उनका पार्टी स्तर पर विरोध भी था। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की सभा में नागर के खिलाफ नारेबाजी भी हुई थी। उनके विरोधी भोपाल आकर कार्यालय पर भी नारेबाजी कर उनका टिकट बदलवाने का उपक्रम कर चुके थे, लेकिन शिवराज सिंह के दखल के चलते नागर को फिर टिकट मिल गया।