देवगुरु बृहस्पति ने बदली अपनी राशि

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। देवताओं के गुरु बृहस्पति राशि परिवर्तन करते हुए धनु राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। इसके चलते यह हर राशि के जातक को अपने नये घर के प्रभाव में लेते हुए प्रभावित करेंगे।

इसमें जहाँ कुछ राशि के जातकों को लाभ होगा, वहीं कुछ राशि के जातकों को परेशानी भी आयेगी। ऐसे में जिन जातकों को गुरु का ये राशि परिवर्तन नुकसान करेगा, वे राशि अनुसार एक उपाय अपनाकर अपना काफी हद तक नुकसान बचा सकते हैं।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ज्योतिष में गुरु को एक शुभ ग्रह माना जाता है। वहीं गुरु को विद्या का कारक ग्रह भी माना गया है। इनके ईष्ट स्वयं भगवान विष्णु माने गये है। वहीं इनका रंग पीला व रत्न पुखराज माना जाता है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ये राशि क्रमशः धनु व मीन के स्वामी हैं। ऐसे में कई बार लोग राशि के आधार पर ही पुखराज धारण कर लेते हैं जो घातक हो सकता है क्योंकि किसी भी रत्न को धारण करने से पहले कुण्डली में उसकी अवस्था को जानना अत्यंत आवश्यक माना गया है। यदि ग्रह आपके लिये नुकसान दायक हो तो ऐसे ग्रह के रत्न से बचना उचित माना गया है।

गुरु के राशि व नक्षत्रों से संबंध : यह धनु और मीन राशि का स्वामी होता है और कर्क इसकी उच्च राशि है जबकि मकर इसकी नीच राशि मानी जाती है। ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह 27 नक्षत्रों में पुनर्वसु, विशाखा, और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी होता है।

गुरु का असर : ज्योतिष में गुरु यानि बृहस्पति को ज्ञान, शिक्षक, संतान, बड़े भाई, शिक्षा, धार्मिक कार्य, पवित्र स्थल, धन, दान, पुण्य और वृद्धि आदि का कारक माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस व्यक्ति पर बृहस्पति ग्रह की कृपा बरसती है उस व्यक्ति के अंदर सात्विक गुणों का विकास होता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है।

वहीं इसके ठीक विपरीत पीड़ित गुरु जातकों के लिये अच्छा नहीं माना जाता है। इसके कारण जातक को विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यदि कोई व्यक्ति शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा है तो उसे इस क्षेत्र में परेशानियां आयेंगी। पीड़ित गुरु के कारण व्यक्ति की वृद्धि थम जाती है और उसके मूल्यों का ह्लास होता है।

कब होगा राशि परिवर्तन : ज्योतिषाचार्यों के अनुसार देव गुरु बृहस्पति 30 मार्च 2019 को रात्रि 03 बजकर 11 मिनिट पर धनु राशि में प्रवेश करेंगे लेकिन इसके बाद 22 अप्रैल को यह शाम 5ः55 बजे वक्री चाल चलते हुए वापस वृश्चिक राशि में लौट आयेंगे। उसके बाद पुनः 05 नवंबर को सुबह 06 बजकर 42 मिनिट पर धनु राशि में प्रवेश करेंगे।