दुकानदार सड़क पर ही फेंक रहे कचरा

 

उन दुकानदारों से मुझे शिकायत है जिनके द्वारा अपनी दुकान का कचरा सड़क पर ही फेंक दिया जाता है और यही कचरा फिर बाद में कई परेशानियों का कारण बनता है।

यहाँ देखने वाली बात यह है कि सभी शहरवासी नगर पालिका सिवनी की सफाई प्रणाली से अच्छी तरह वाकिफ हैं उसके बाद भी दुकानदारों के द्वारा सड़क पर कचरा फेंका जाना यह दर्शाता है कि वे भी अपने प्रतिष्ठानों की गंदगी से शहर को गंदा करना चाहते हैं। बेहतर होगा कि ऐसे दुकानदारों के द्वारा डस्टबिन का उपयोग किया जाकर उसमें कचरा फेंका जाये और जब कभी उनके क्षेत्र में कचरा वाहन आये तब दुकान का यह कचरा उन वाहनों में डाल दिया जाये।

सिवनी में ज्यादातर बुधवारी और बारापत्थर क्षेत्र के बाहुबली चौक पर कई दुकानदारों के द्वारा अपनी दुकान का कचरा रात के समय में सड़क पर बेतरतीब तरीके से फेंक दिया जाता है। यह कचरा सूखने के उपरांत कुछ ही देर बाद वापिस नालियों में समा जाता है जो नालियों को चोक करने का पर्याप्त कारण बनता है। सिर्फ दुकानदार ही नहीं बल्कि कई घरों से भी रात के समय कचरा निकालकर सड़क पर फेंक दिया जाता है।

इस कचरे का बहुत सा हिस्सा तो नालियों में जाकर समा जाता है लेकिन जो कचरा नालियों मेें नहीं जा पाता है वह सड़क पर गंदगी फैलाता रहता है। इस तरह नालियों के साथ ही साथ सड़क पर भी गंदगी पसरी होने के कारण कई तरह की बीमारियों के जन्म लेने की संभावनाएं बलवती हो जाती हैं। यही नहीं बल्कि सड़क पर स्वच्छंद रूप से विचरते आवारा पशुओं को भी यह कचरा उनके भोज्य पदार्थ के रूप में दिखायी देता है जिसके कारण ये आवारा पशु सडकों को त्यागने के लिये तैयार ही नहीं दिखते हैं और नगर पालिका इन आवारा पशुओं के स्वच्छंद रूप से विचरने की ओर से आँखें मूंदे बैठी ही है।

नगर पालिका के द्वारा दिन में एक बार कचरा वाहन को शहर के विभिन्न स्थानों में इसलिये घुमाया जाता है ताकि उसमें कचरा का निष्पादन बिना गंदगी फैलाये किया जा सके। उसके बाद भी कई लोग अपने गैर जिम्मेदार होने का परिचय दे रहे हैं। दरअसल आवश्यकता इस बात की है कि हम सभी स्वयं के जागरूक होने का परिचय दें। ऐसे दुकानदार जो सड़क पर कचरा नहीं फेंकते हैं उनके द्वारा उन दुकानदारों को समझाईश दी जाना चाहिये जो अपने कर्त्तव्यों के प्रति जागरूक नहीं हैं। उनसे कहा जाये कि नगर पालिका के भरोसे न बैठे रहकर खुद भी शहर के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें और कम से कम कचरे को सड़क पर न फेंकें।

निखिल बरमैया

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