भीषण गर्मी में प्राथमिक शालाओं का समय घटाया जाये!

 

इस स्तंभ के माध्यम से मैं जिला प्रशासन के साथ ही साथ शिक्षा विभाग से भी अपील करना चाहता हूँ कि भीषण गर्मी में कम से कम प्राथमिक शालाओं का समय घटाया जाना चाहिये।

गौरतलब होगा कि सिवनी में भीषण गर्मी का दौर आरंभ हो चुका है। मार्च के अंतिम दिनों में ही अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर जा चुका है और अप्रैल के पहले पखवाड़े में भी पारे की यह वृद्धि बनी हुई है जिसके आने वाले दिनों में और भी ऊपर जाने की निश्चित संभावना है। ऐसे में प्राथमिक शालाओं के विद्यार्थियों को दोपहर के वक्त तपती सड़कों पर दौड़ाना उचित नहीं कहा जा सकता है।

सुबह लगने वाली शालाएं अमूमन बारह बजे के आसपास छूटतीं हैं। ऐसे में मासूम विद्यार्थी जब वाहन से उतरकर अपने घरों की ओर जाते हैं तब दोपहर की धूप अपने चरम पर पहुँच रही होती है। वे विद्यार्थी भाग्यशाली होते हैं जिनके घर तक शालेय वाहन पहुँचते हैं और उन्हें सड़क पर ज्यादा नहीं चलना होता है। बावजूद इसके शालेय वाहनों में दोपहर की भीषण गर्मी में वे विद्यार्थी भी वाहन के अंदर छांव में तो होते हैं लेकिन नियम विरूद्ध तरीके से ठसाठस भरे वाहन में गर्मी के कारण व्याकुल ही होते रहते हैं।

यही स्थिति जून के महीने में भी देखी जाती है। देखा जाये तो प्राथमिक शालाओं में इतना कोर्स नहीं होता है कि बच्चों को अप्रैल और जून के महीने में भी शाला जाने के लिये मजबूर किया जाये। माना जाता है कि फीस वसूलने के लिये निजि शालाओं के द्वारा समय सारिणी को कुछ इस तरह से तैयार किया जाता है कि उनके द्वारा साल के बारह महीनों की ही फीस वसूली जाती है। शासन-प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।

शाला प्रबंधन यदि ईमानदारी से काम लेता है तो एक दक्ष शिक्षक जुलाई से फरवरी के मध्य ही बहुत आसानी के साथ, प्राथमिक शालाओं का कोर्स कम्लीट करवा सकता है। इसके लिये अतिरिक्त समय की कहीं कोई आवश्यकता नहीं रह जाती है। यदि निजि शालाओं के जबरन फीस वसूलने के धंधे पर लगाम नहीं लगायी जा सकती है तो जिला प्रशासन से अपील है कि वह कम से कम ऐसे आदेश जारी करे जिसके तहत प्राथमिक शालाओं के विद्यार्थियों को सुबह ग्यारह बजे तक छुट्टी दे दी जाये ताकि भीषण गर्मी का प्रकोप मासूम विद्यार्थियों को सहन न करना पड़े।

गुड्डू नकवी

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