जनतंत्र पर हावी होता दिख रहा धनतंत्र

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कॉमरेड डी.डी. वासनिक एवं मीडिया प्रभारी कॉमरेड यीशु प्रकाश का आरोप है कि वर्तमान चुनावी समय में जनतंत्र पर धनतंत्र के हावी होने की कोशिशें जारी हैं।

कॉमरेड द्वय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार इसका प्रमाण विभिन्न समाचार पत्रों में धन कुबेरों द्वारा अपने वाहनों के माध्यम से चुनावी कार्य के उपयोग में लाने के लिये ढोयी जा रही भारी तादाद में भारतीय मुद्रा का चुनाव आयोग द्वारा जप्त करना है। देश मे चुनावी प्रक्रिया के तहत चुनाव का पहला चरण जारी हो गया है और यह सातवें चरण में समाप्त हो जाना है इस अवधि में पूंजीपति और कारपोरेट घराने के लोग अपनी पसन्द का सांसद निर्वाचित करने की कोशिश में लगे हुए हैं, जिससे अपने पक्ष में अपने मनपसंद सांसद को चुनाव में जिताकर अपने पक्ष में कानून बनाने के लिये इन सांसदों का उपयोग संसद में कर सकें।

विज्ञप्ति के अनुसार इस कारण किसी भी तरह अपने पसंदीदा सांसद को जिताने के लिये काले धन का उपयोग किया जा रहा है। इसी कड़ी में मण्डला जिले के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते द्वारा यह स्वीकार करना कि पिछले समय उन्होंने चुनाव में 10 करोड़ रूपये खर्च किया था और इस चुनाव में उन्हें लगभग 12 से 15 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।

विज्ञप्ति के अनुसार सांसद कुलस्ते एक साधारण किसान के मण्डला जिले के ग्राम बबलिया के किसान के पुत्र हैं जिनके पास 10 या 15 करोड़ रुपये कहाँ से आयेंगे, यह सब कारपोरेट घरानों की देन है। सांसद कुलस्ते भाजपा के उम्मीदवार हैं और भाजपा एक पूंजीपति पार्टी है जिन्हें कारपोरेट घरानों से रुपयों की बौछार प्राप्त होती है।

विज्ञप्ति के अनुसार एक साधारण उम्मीदवार के लिये चुनाव में जाना बड़ा मुश्किल होता है फिर भी चुनाव आयोग ने 70 लाख की सीमा निश्चित की है जिसकी कई गुना राशि पूंजीपति उम्मीदवार खर्च करते हैं, जबकि एक साधारण उम्मीदवार के लिये 70 लाख के स्थान पर 07 लाख राशि जुटाना भी मुश्किल होता है और अपरोक्ष रूप से गरीब उम्मीदवार स्वयं ही चुनाव प्रक्रिया से अलग कर दिया जाता है।

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