पेय पदार्थ के नाम पर परोसी जा रहीं हैं बीमारियां!

 

 

अमानक बर्फ के साथ ही साथ हो रहा खतरनाक कैमीकल्स का प्रयोग

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। मौसम की लुकाछिपी के बाद अब गर्मी शवाब पर आती दिख रही है। पारा जिस तेजी से बढ़ रहा है उसके चलते अब शीतल पेय और पानी की माँग बढ़ने लगी है। इन परिस्थितियों में जिले भर में पेयजल और शीतल पेय का कारोबार तेज हो चला है। इस शीतल पेय की कहीं जाँच न होने से लगने लगा है मानो शीतल पेय के नाम पर बीमारियां परोसी जा रही हों।

गर्मी के मौसम में स्थान – स्थान पर शीतल पेय पदार्थों की दुकानें खुल गयी हैं लेकिन इन दुकानों में बीमारियां ही परोसी जा रही है, जिसकी ओर संबंधित विभाग का किसी तरह से ध्यान नहीं है। नगर मुख्यालय में ही दर्जनों ऐसी दुकानें है, जहाँ पर शीतल पेय पदार्थ का कारोबार किया जा रहा है।

इन स्थानों पर आमरस से लेकर गन्ना रस भी बेचा जा रहा हैं। पेप्सी, कोका, दही, मट्ठा व लस्सी, कुल्फी का विक्रय हो रहा है, लेकिन इन स्थानों पर रख रखाव के उचित साधन नहीं हैं। इसके साथ ही उक्त वस्तुओं में मिलावटी पदार्थों का ज्यादा उपयोग किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आम के रस की दुकान पर इतनी कम दर पर एक गिलास जूस पिलाया जा रहा है, कि वर्तमान में उस दर पर आम कहीं मिल ही नहीं रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह आम का रस, रासायनिक पदार्थाें को मिलाकर बनाया जाता है। उसमें नाम मात्र के लिये आम का उपयोग किया जाता है।

इसी तरह सभी पेय पदार्थों में बर्फ का सरेआम उपयोग किया जा रहा है। यह बर्फ शुद्ध पानी से बनाया जा रहा है या नहीं, इसकी चिन्ता करने वाला कोई नहीं है। पेय पदार्थों को लेकर जहाँ रख रखाव का अभाव देखा जा रहा है वहीं उसमें धूल मिट्टी के कण भी समा रहे हैं।

यहाँ उल्लेखनीय है कि जिन स्थानों पर दुकानों का संचालन हो रहा है वे स्थान ज्यादा आवागमन और भीड़ भाड़ वाले हैं। इन स्थानों पर वाहनों की धमा चौकड़ी मची रहती हैं। बस स्टैण्ड से लेकर अन्य चौक – चौराहों पर इन शीतल पेय पदार्थों की दुकानों का संचालन किया जा रहा हैं।

इन स्थानों पर आमजनों के आवागमन का भी भारी दबाव रहता है लेकिन सामग्रियों को ढंका हुआ नहीं रखा जा रहा है, बल्कि ये सामग्रियां खुले में ही रखी होती हैं। इन पर मिट्टी – धूल के कण जमा हो रहे हैं। इन वस्तुओं के निर्माण में शुद्ध पानी का उपयोग भी नहीं किया जा रहा। इन मिलावटी सामग्रियों के पास मक्खियां भी भिनभिनाती हुईं देखी जा सकती हैं।

वर्तमान में मौसमी बीमारी का प्रकोप बढ़ गया है। मौसमी बीमारी के लिये खानपान को प्रमुख कारण माना जा रहा है, जिसमें इन शीतल पेय पदार्थों की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। हालात ये हैं कि आमजनों को शुद्ध पेय नहीं पिलाया जा रहा है।

परिस्थितियां देखकर एक तरह से कहा जा सकता है कि पेय पदार्थ के नाम पर बीमारी को परोसा जा रहा है। चिकित्सकों द्वारा भी सलाह दी जाती हैं कि गर्मी के दिनों में खानपान में विशेष सावधानी बरतना चाहिये, जिसके तहत खुले में शीतल पेय पदार्थ के सेवन से बचना चाहिये। बावजूद इसके संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा किसी तरह की कार्यवाही नहीं की जा रही है।

जिले में नगर पालिका परिषद और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन कार्य करने वाले खाद्य एवं औषधि प्रशासन के द्वारा भी इस तरह से शीतल पेय की बजाय बीमारियों के परोसे जाने की जाँच न किया जाना आश्चर्य का ही विषय बना हुआ है।

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