कबाड़ में रखे कूलर, मरीज हलाकान

 

 

 

चिकित्सक मजे से ले रहे एसी की ठण्डी हवा!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। प्रियदर्शिनी के नाम से सुशोभित जिला चिकित्सालय में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। गर्मी के तेवर भले ही कुछ नरम पड़े हों, पर अभी भी उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। इन परिस्थितियों में जिला चिकित्सालय के वार्ड्स में कूलर नहीं लगाये गये हैं, जिसके कारण यहाँ भर्त्ती मरीजों का पसीना निकला जा रहा है।

ज्ञातव्य है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा के द्वारा जिला मुख्यालय में सत्तर के दशक के अंतिम सालों में बारापत्थर में मिनी मेडिकल कॉलेज की अर्हता वाले जिला चिकित्सालय की संस्थापना का काम करवाया गया था। उनके द्वारा दी गयी इस उपलब्धि को उनके बाद जिले के सांसद और विधायक सहेज भी नहीं पा रहे हैं।

चार सौ बिस्तर वाले इस अस्पताल में चिकित्सकों के लिये तो वातानुकूलित कक्ष उपलब्ध है पर जब बात मरीजों की आती है तो यहाँ भर्त्ती मरीजों को इस भीषण गर्मी में कूलर की ठण्डी हवा भी मुहैया नहीं हो पा रही है। दोपहर में उमस भरी गर्मी में हवा के थपेड़ों से मरीज और उनके परिजन हलाकान ही नजर आ रहे हैं।

बताया जाता है कि गर्मी के आरंभ होने के लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी अस्पताल के वार्डों में कूलर नहीं लगाये गये हैं। कुछ वार्ड में कूलर रखवा अवश्य दिये गये हैं किन्तु इनमें पानी नहीं डाले जाने के कारण ये गर्म हवाएं उगल रहे हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक कार्यालय में चल रहीं चर्चाओं के अनुसार हर साल की तरह इस साल भी पुराने कूलर्स के संधारण और नये कूलर्स खरीदने के लिये लाखों रूपये खर्च किये जाने के बाद भी मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

मरीजों के परिजनों की मानें तो इन कूलर्स में न तो खस ही बदली जा रही है और न ही इनका रखरखाव ही किया जा रहा है। आधी गर्मी निकल जाने के बाद भी अब तक प्रियदर्शिनी के नाम से सुशोभित जिला अस्पताल में मरीजों को कूलर की ठण्डी हवा के लिये और भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

परिजनों ने बताया कि अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड के बाहर कबाड़ की तरह कूलर्स पड़े हुए हैं। इतना ही नहीं अनेक वार्डों के पंखे भी खराब हैं। मरीज अपने गमछे या कागज आदि के टुकड़ों से हवा करके इस भीषण गर्मी से निजात पाने का असफल प्रयास करते दिख रहे हैं। इसमें भी सबसे ज्यादा मुसीबत बुखार के मरीजों की हो रही है।

कहा जा रहा है कि अस्पताल को सांसद, विधायकों और जिला प्रशासन के द्वारा भगवान भरोसे ही छोड़ दिया गया है। अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधारने के लिये कोई भी आगे आता नहीं दिख रहा है। इसके परिणाम स्वरूप अस्पताल में भ्रष्टाचारियों के लिये यह समय स्वर्णिम युग से कम नहीं माना जा रहा है।

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