ऐतिहासिक इमारतों का लौटे वैभव तो फिर से गुलजार हो नवाबों का शहर भोपाल

 

 

 

 

(ब्‍यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। खिलखिलाहटों से गुलजार होता था कभी ताजमहल का आंगन, घुघंरुओं की झंकार से गूंजती थीं गोल घर की दीवारें, अटखेलियों की यादें आज भी झांकती हैं गौहर महल के झरोखों से, मोल-भाव का खेल चलता था सदर मंजिल के गलियारे में… कुछ धूल जमा हुई है दरकती हुई इन इमारतों पर…. लेकिन यादें आज भी जिंदा हैं। इन्हीं यादों को फिर सांसें दी जा रहीं हैं। भोपाल आने वाले सालों में एक बार फिर अपने नवाबकाल को जीने के लिए तैयार होगा।

राज्य पुरातत्व संग्रहालय, राज्य संग्रहालय, पर्यटन विकास निगम और भोपाल जिला प्रशासन के सहयोग से भोपाल की पुरातत्व धरोहरों को संजोने का काम चल रहा है। अलग-अलग विभाग ताज महल, सदर मंजिल, मिंटो हॉल, इकबाल गेट, कमलापति महल, इस्लाम नगर, गोल घर को एक बार फिर आबाद करने के लिए रिनोवेशन कर रहे हैं। वल्र्ड हैरिटेज डे पर पत्रिका प्लस शहर की कुछ ऐसे ही संरक्षित स्थानों से रू-ब-रू करा रहा है।

5 करोड़ की लागत फिर हो रहा गुलजार

पुरातत्व विभाग इस्लाम नगर का संरक्षण कर रहा है। इस्लाम नगर को अफगान कंमाडर दोस्त मोहम्मद खान ने 1715 में बनवाया था। 1723 में शक्तिशाली निजाम को यह किला सौंपने पर मजबूर कर दिया था। ये प्रोजेक्ट करीब तीन साल से चल रहा है। शुरुआत में इसके लिए पांच करोड़ का बजट रखा गया। रिनोवेशन वर्क को देखते हुए फंड को बढ़ाया जा रहा है। विभाग के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश पराजंपे के अनुसार यहां चमन महल की आर्च की रिपेयरिंग की जा रही है। वहीं परकोटे को पुराना लुक दिया जा रहा है। इसके लिए करीब 60 लाख का फंड स्वीकृति किया गया है।

वहीं भोपाल रियासत की नवाब शाहजहां बेगम की बनाए बाग निशात अफजा इमारत को रेनोवेट कर रहा है। हालांकि इमारत के अधिकांश हिस्से में सरकारी बंगले बन गए हैं पर बाग वाला हिस्सा सुरक्षित है। बाग निशात अफजा भवन गोलाकार है। इसमें प्रवेश के चार दरवाजे हैं और चारों दरवाजों के नीचे से चार सुरंग हैं जो महल के बीचोंबीच निकलती हैं। महल के अंदर आकर्षक नक्काशी है। चारों तरफ से दरवाजे बंद होने पर रहती है।

ये हैं भोपाल की ऐतिहासिक धरोहर

भोपाल और इसके आसपास ऐतिहासिक धरोहरों का खजाना बिखरा पड़ा है। आशापुरी, इस्लामनगर, सलकनपुर इटारसी और समसगढ़ को पुरातत्व विभाग संरक्षित कर रहा है। वहीं, कमलापति महल को एएसआई ने संरक्षित स्मारक घोषित कर रखा है। इसके साथ ही विश्व धरोहर भीम बैठका और सांची स्तूप की देखरेख भी एएसआई करता है। बेनजरी महल, ताजमहल जहां एमपी टूरिज्म बोर्ड के संरक्षण में है तो मिंटो हॉल एमपी टूरिज्म कॉर्पोरेशन संभाल रहा है। नगर निगम ने सदर मंजिल, शीश महल और शहीद गेट की देखभाल का जिम्मा संभाल रखा है। स्मार्ट सिटी कॉर्पोरेशन डेढ़ करोड़ की लागत से सदर मंजिल का पुराना स्वरूप में लौटा रही है। हस्तशिल्प विकास निगम ने गौहर महल को संरक्षित किया हुआ है।

11वीं सदी का लौटेगा वैभव

पुरातत्व विभाग के अनुसार सलकनपुर इटारसी में 11वीं शताब्दी का शिव मंदिर है। इसका संरक्षण किया जा रहा है। भूतनाथ मंदिर परिसर में 23 मंदिर हैं। इनमें से तीन मंदिर ऐसे हैं जिनके अवशेष अच्छी हालत है। इन्हें फिर से तैयार किया जाएगा। वहीं अन्य मंदिरों के पत्थरों की संख्या कम होने से अगले चरण में इनका काम होगा। विभाग इसकी डीपीआर तैयार कर रहा है। वहीं, गोलघर परिसर में स्थित इमारतों की विरासत को भी बचाने की कोशिशें की जा रही है। इसे नवाब शाहजहां बेगम ने गरीबों की मदद के लिए तैयार राया था। इसे म्यूजियम का लुक दिया गया है।

सांची स्तूप पर दर्शकों को मिलेगा नया अनुभव

एएसआई के अनुसार सांची स्तूप मुख्य स्तूप के आसपास भी कई मॉन्यूमेंट्स बिखरे हैं। अभी पर्यटक इन पर चढ़ जाते हैं। इनके संरक्षण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। एक से दो माह में रेलिंग लगाने और संरक्षण का काम शुरू हो जाएगा। जल्द ही दर्शकों को सांची स्तूप परिसर को देखने का नया अनुभव मिलेगा।

अतिक्रमण देख पीछे हटा पुरातत्व विभाग

शहर में तीन मोहरे, इस्लामी गेट, ताजमहल दरवाजा, जूमेराती दरवाजा, मिलिट्री दरवाजा, काला दरवाजा, पीर दरवाजा, इमामी दरवाजा, मंगल दरवाजा, पुराना किला दरवाजा, लाल दरवाजा और बुधवारा दरवाजा जैसी ऐतिहासिक धरोहर हैं। इस ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की जिम्मेदारी नगर निगम, जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग एक-दूसरे पर डालते हैं। जिला प्रशासन के अफसरों ने कुछ समय पहले पुरातत्व विभाग को इनका संरक्षण करने के निर्देश दिए, लेकिन इन दरवाजों के आसपास इतना अतिक्रमण है कि पुरातत्व विभाग ने भी हाथ खड़े कर दिए।