फिर खली ट्रामा यूनिट की कमी

एक बना नहीं, जो बना वह है शोभा की सुपारी

(सादिक खान)

सिवनी (साई)। एक के बाद एक सड़क हादसों के बाद ट्रामा केयर यूनिट की कमी शिद्दत से महसूस की जा रही है। एनएचएआई के द्वारा सिवनी के नये बायपास पर प्रस्तावित ट्रामा केयर यूनिट अब तक अस्तित्व में नहीं आ सका है तो दूसरी ओर जिला अस्पताल का ट्रामा केयर युनिट चार सालों से बनकर तैयार है पर इसे आरंभ नहीं कराया जा सका है।

सोमवार के दर्दनाक भीषण सड़क हादसे के बाद जिले में ट्रामा केयर यूनिट की कमी एक बार फिर बुरी तरह खली। जिला मुख्यालय में एनएचएआई को 2010 में ही एक ट्रामा केयर यूनिट की संस्थापना करवा देना चाहिये था। इस ट्रामा केयर यूनिट का परिचालन केन्द्र सरकार के द्वारा किया जाता।

एनएचएआई के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पब्लिक सेफ्टी और सेक्युरिटी के मापदण्डों को किसी भी कीमत पर विलोपित नहीं किया जा सकता है। इन मापदण्डों का हर तीन साल में पुनरीक्षण कर इन्हें अपग्रेड किया जाना चाहिये, किन्तु सिवनी में ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा है।

सूत्रों ने आगे बताया कि सिवनी के नये बायपास पर लेवल तीन के इस ट्रामा केयर यूनिट के लिये स्थान भी आवंटित कर दिया गया है। एनएच की देखरेख कर रही सद्भाव कंपनी को इसका निर्माण करना था लेकिन आज तक इसके लिये भवन का निर्माण ही नहीं कराया गया है, जिसके चलते इसे आरंभ नहीं कराया जा सका है।

सूत्रों ने बताया कि एनएचएआई की सड़क सुरक्षा की गाईड लाईंस में स्पष्ट निर्देंश हैं कि हर तीन सौ किलो मीटर के क्षेत्र में लेबल 04 का ट्रामा केयर यूनिट (पूरी तरह संसाधनों से युक्त) होनी चाहिये। इसके साथ ही प्रत्येक 150 किलो मीटर की दूरी पर लेबल 03 की केयर यूनिट होना चाहिये जो नरसिंहपुर और सिवनी जिले के जिला मुख्यालय में बनाया जाना चाहिये था।

सूत्रों ने बताया कि गाईड लाईन में यह व्यवस्था भी है कि प्रत्येक 50 किलो मीटर पर एक एंबुलेंस की व्यवस्था होना चाहिये जो अलोनिया और बटवानी के पास रहना चाहिये थीं। लगभग चार पाँच साल पहले प्रशासन ने किसी वीआईपी के आने पर इन दोनों एंबुलेंस को अधिग्रहित कर जिला अस्पताल के सुपुर्द कर दिया गया था तब से ये अब तक वीआईपी मूवमेंट पर ही नजर आती हैं।

सिवनी में लापरवाही किस स्तर पर हो रही है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में 2014 से एक ट्रामा केयर यूनिट का भवन बनकर तैयार है। पहले इसका उपयोग नर्सिंग के छात्रावास के रूप में किया जाता रहा। बीते दो साल से इसमें मशीनंे पड़ी – पड़ी धूल खा रही हैं।

यहाँ यह उल्लेखनीय होगा कि जिला अस्पताल में डॉ.विनोद नावकर, डॉ.महेन्द्र ओगारे, डॉ.कृष्णा सिरोठिया जैसे योग्य सर्जन होने के बाद भी इस यूनिट को यहाँ आरंभ नहीं कराया जा सका है। आवश्यकता पड़ने पर डॉ.दिनेश शर्मा और डॉ.एम.एन. त्रिवेदी जैसे निजि सर्जन्स की सेवाएं भी यहाँ ली जा सकती हैं।