मेरा वोट अनमोल : मतदान अवश्य करें

 

 

लोगों ने साझा किये अपने-अपने पुराने अनुभव

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। लोकसभा के लिये सोमवार 29 अप्रैल को बालाघाट और मण्डला संसदीय क्षेत्र के लिये मतदान होना है। लोकतंत्र के इस महापर्व के पहले समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के द्वारा कुछ लोगों से इसके पहले हुए चुनावों के संबंध में उनके अनुभवों के बारे में जानकारी चाही गयी।

शिक्षा विभाग से सेवा निवृत्त देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने अपने अनुभव साझा करते हुए समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान बताया कि उनके द्वारा पहली बार 21 साल की उम्र में वोट दिया गया था। उन्होंने बताया कि उस समय जो चुनावी माहौल था गजब का था। लोगों के पास न तो टीवी था और न ही मोबाईल, जो नेता प्रचार के लिये आते थे उनके भाषण को सुनने का अलग ही मजा होता था।

सत्तर के पेटे में पहुँच चुकीं गृहणी श्रीमति कृष्णा गुप्ता का कहना था कि तीन चार दशक पहले नेताओं के भाषण में एक भावनात्मक जुड़ाव होता था और वास्तविकता का अहसास भी, लेकिन आज नेता सोशल मीडिया पर छाये रहते हैं। इसके जरिये कई झूठी अफवाहें फैल जाती हैं। उस समय वोट देने के लिये अंदर से उत्साह होता था, लेकिन आज चुनावी माहौल में परिवर्तन आ गया है।

उमर दराज हो चुके अपने जमाने के हॉकी के हरफनमौला खिलाड़ी अनिल नायक का कहना है कि वोट देना हर भारतीय का अधिकार है और इस अधिकार का उपयोग हर मतदाता को जरूर करना चाहिये। मतदाता को चाहिये कि वे एक अच्छे, सच्चे और ईमानदार नेता का चयन करें।

शिक्षा विभाग से सेवा निवृत्त शिक्षिका श्रीमति निर्मला शर्मा ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पहले के चुनावी माहौल और आज के चुनावी माहौल में जमीन आसमान का अंतर आ चुका है। पहले जागरूकता के अभाव में मतदाता घर से नहीं निकलते थे पर आज मतदाता जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है जिसके अच्छे प्रतिसाद सामने आ रहे हैं।

वहीं, व्यवसायी लक्ष्मी प्रसाद अग्रवाल ने कहा कि मतदान के दिन अवकाश होता है। इसके चलते लोग अपना कार्यक्रम पहले से ही तय कर लेते हैं। कुछ लोग इस दिन सैर सपाटा और परिवार या मित्रों के साथ पिकनिक मनाने भी जाते हैं। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि सबसे पहले मतदान करें उसके बाद ही दूसरे काम के लिये निकलें।

सेवा निवृत्त जिला आयुष अधिकारी डॉ.अखिलेश बक्शी का मानना है कि लोकतंत्र के इस महापर्व में सभी की भागदीरी होना चाहिये, इसलिये मतदान अवश्य करें। उन्होंने बताया कि इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में लोगों की सोच में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि मतदान केंद्रों में मतदाताओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिये।

सेवा निवृत्त बैंक प्रबंधक विष्णु सिंह राजपूत ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि सरकारी योजनाओं में सब्सिडी छोड़ने की अपील हुक्मरानों के द्वारा तो की जाती है पर जब बात संसद की कैंटीन या सांसदों, विधायकों के वेतन भत्तों की आती है तो सभी मौन ही धारण कर लेते हैं। उन्होंने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि मतदान के इस महापर्व में अपनी – अपनी भागीदारी हर मतदाता सुनिश्चित करे।

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