साक्षात श्रीकृष्ण का स्वरूप हैं गिरिराज गोवर्धन

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। कण्डीपार हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह में ओम शंकर महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। कथा का श्रवण करने श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है।

भागवत कथा में महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण, विष्णु के अवतार हैं। सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्व पापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं। जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है, तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं।

कथा वाचक महराज ने भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि कृष्ण के पैदा होने के बाद कंस ने पूतना को भेजा, वेश बदलकर आयी पूतना को भगवान श्रीकृष्ण ने मोक्ष प्रदान किया। कार्तिक माह में ब्रजवासी गोवर्धन महाराज की पूजन आतुर होते हैं। कृष्ण के मना करते ही इन्द्र भगवान क्रोधित हो जाते हैं। वह अपने क्रोध से भारी वर्षा करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर पूरे नगर वासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाकर इंद्र का अभिमान तोड़ा। कथा में महाराजश्री ने भाव विभोर भजनों का श्रवण भी कराया, बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं ने कथा व भजनों का श्रवण किये।

महाराजश्री ने कहा कि गोवर्धन महाराज कोई साधारण पर्वत नहीं हैं, बल्कि ब्रज वासियों की रक्षा हेतु स्वयं भगवान श्रीकृष्णही समाहित हुए थे। ये साक्षात श्रीकृष्ण ही हैं। ब्रजवासी इन्हें अपना गुरु मानते हैं। गुरु पूर्णिमा में लाखों लोग इनकी शरण में जाकर परिक्रमा करते हैं। गिरिराज की सुंदर झांकी सजायी गयी जिनका पूजन व परिक्रमा भक्तों द्वारा किया गया। संपूर्ण मंदिर परिसर गिरिराज के जयकारों से गुंजायमान हो गया। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर पूरे नगर वासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाकर इंद्र का अभिमान तोड़ा। कथा के दौरान भक्तिगीतों व भजनों को सुनकर श्रोता भावविभोर हो गये।