ट्रामा केयर को लेकर कलेक्टर आये हरकत में

 

 

प्रवीण सिंह पहुँचे जिला अस्पताल, ली जमीनी हालातों की जानकारी

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। यूँ तो जिले में सड़क हादसे रोज ही बहुतायत में होते हैं, इन हादसों में लोग जान भी गंवा देते हैं, पर प्रशासन के द्वारा शायद ही कभी इस तरह के मामलों को संजीदगी से लिया होगा। यह पहली बार ही हुआ होगा कि अर्द्ध सैनिक बल की महिला जवान की हादसे में हुई मौत के बाद जिलाधिकारी संजीदा हुए हों।

जिला कलेक्टर कार्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिला कलेक्टर के राडार पर अब स्वास्थ्य विभाग विशेषकर जिला चिकित्सालय आता दिख रहा है। दरअसल, शुक्रवार को हुए हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग विशेषकर जिला चिकित्सालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं को देखकर जिला कलेक्टर बेहद नाराज लग रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि हो सकता है कि स्वास्थ्य विभाग के बाजीगर अधिकारी अपने पॉलिश्ड रवैये से जिला कलेक्टर की इस नाराजगी को अपनी चतुराई से शांत करवा दें। शनिवार को जिला कलेक्टर के अस्पताल भ्रमण के दौरान भी कुछ इसी तरह का नजारा देखने को मिला।

सूत्रों ने बताया कि जिला अस्पताल में 65 लाख रूपये की लागत से ट्रामा केयर यूनिट की इमारत बनी हुई है। इस भवन का उपयोग पहले नर्सेस के प्रशिक्षण केंद्र के छात्रावास के रूप में किया जाता रहा। इसके बाद दो सालों से करोड़ों रूपयों की यह बिल्डिंग धूल खा रही है।

वैसे जिला मुख्यालय में एनएचएआई को 2010 में ही एक ट्रामा केयर यूनिट का भवन सिवनी बायपास पर बनाया जाना चाहिये था। इसका परिचालन केन्द्र सरकार के द्वारा किया जाना प्रस्तातिव था। इसके सेफ्टी मापदण्डों को हर तीन साल में अपग्रेड किया जाना चाहिये था।

सड़क सुरक्षा के नियमों में साफ निर्देश हैं कि किसी भी दशा में इसे डिलीट नहीं किया जा सकता है। सिवनी के नये बायपास पर इस ट्रामा केयर यूनिट के लिये स्थान भी आवंटित कर दिया गया है। एनएचआई की देखरेख कर रही सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी को इसका निर्माण करना था लेकिन आज तक यहाँ भवन का निर्माण नहीं हो पाया है।

सूत्रों की मानें तो जिला मुख्यालय में ट्रामा केयर के दो यूनिट अस्तित्व में होना चाहिये थे। एक का परिचालन राज्य सरकार के द्वारा किया जाता और दूसरे का एनएचएआई को करना था। अब सभी अपनी – अपनी खाल बचाने के चक्कर में 2014 में बने ट्रामा केयर यूनिट के भवन को ही एनएचएआई और राज्य सरकार का करार दे रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि इस मामले में अगर जिलाधिकारी के द्वारा एनएचएआई को एक कड़ा पत्र लिख दिया जाये तो सिवनी में एनएचएआई का ट्रामा केयर यूनिट जल्द ही अस्तित्व में आ जायेगा। अगर ऐसा हुआ तो जिले में सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को नागपुर की बजाय जिले में ही फौरी चिकित्सकीय मदद मिल जायेगी।

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