बाग-बगीचों को तरस रहा छपारा!

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

छपारा (साई)। छपारा की शान में कसीदे गढ़ने के लिये शहर के नेता माहिर हैं और छपारा के इतिहास के बारे में लोगों को बड़े अच्छे से समझाते हुए देखे भी जाते हैं। वे यह भी बताते हैं कि छपारा के नाम से ही सिवनी का नाम जाना जाता है। वास्तव में देखा जाये तो उन नेताओं को छपारा की जरा भी फिक्र नहीं है। शहर में नये निर्माण तो दूर, पुराने को ही सहेजने की फिक्र भी किसी को नजर नहीं आती है।

नगर की सूरत दिन ब दिन बद से बदतर होती जा रही है। नगर में बच्चों एवं परिवार के साथ कुछ पल उद्यान में अगर आपको गुजारना हो तो ऐसा कोई उद्यान छपारा में है ही नहीं। पूर्व ग्राम पंचायत ने शहर में बाल उद्यान बनाया था जो शुरूआती दौर से ही रख रखाव एवं मेंटेनेंस के अभाव में बर्बाद हो गया। अब इस उद्यान में सूकरों को लोटता हुआ सहज ही देखा जा सकता है।

पंचायत द्वारा मूलभूत एवं पंचायत निधि से बाल उद्यान के काम का फरवरी 2007 में तत्कालीन सांसद श्रीमति नीता पटेरिया के मुख्य आतिथ्य में व शशि ठाकुर विधायक की अध्यक्षता में सरपंच कलीराम भारती की उपस्थिति में लाखों की लागत से श्रीगणेश किया गया था।

12 वर्ष पूरे होने के बाद भी जिस उद्देश्य से यह बनाया गया था अब तक उसकी पूर्ति नहीं की जा सकी है बल्कि देख-रेख के अभाव मे लाखों की लागत से बने उद्यान की दुर्दशा ही होती जा रही है। भारी भरकम लोहे के गेट, बच्चों के खेलने की विभिन्न सामग्री, लोह झूला व अन्य सौंदर्यीकरण के साधन वहाँ पर स्थापित किये गये थे, जो पंचायत की लापरवाही के चलते देखरेख के अभाव में नष्ट या चोरी हो गये हैं।

उक्त उद्यान की भूमि पर कुछ लोगों के द्वारा कुछ माह पहले कब्जा किये जाने की भी जानकारी मिली थी, जिसके बाद पंचायत के आला अधिकारी व राजस्व अमला सक्रिय हुआ तब जाकर वहाँ से कब्जा हटवाया गया। छपारा के डुंगरिया वार्ड में बने इस उद्यान की अब किसी तरह की पहचान शेष नहीं बची है। वर्तमान पंचायत भी इसकी देखरेख की दिशा में कोई ध्यान नहीं दे रही है जिसके कारण स्थानीय रहवासी अब यहाँ कचरा फेंकने लगे हैं। यही नहीं बल्कि शाम ढलते ही ये स्थान असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है। नागरिकों ने पार्क के पुर्नउद्धार की माँग की है।