जानिये महिलाओं से संबंधित कानूनों को

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। महिलाएं खुद को पुरुषों से कम मानती हैं, कमजोर मानतीं हैं। दरअसल, बचपन से उनके दिमाग में यह फिक्स कर दिया जाता है कि वो कमजोर हैं और पुरुषों की मदद से ही आगे बढ़ सकती हैं। आज उच्च शिक्षित और नौकरीपेशा महिलाएं भी अपने अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं रखतीं। कभी ठगी जातीं हैं तो कभी आपराधिक गतिविधियों का शिकार होती रहतीं हैं।

कानून के जानकारों के द्वारा महिलाओं को दिये गये अधिकारों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी, इसके अनुसार :

समान वेतन का अधिकार : समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, अगर बात वेतन या मजदूरी की हो तो लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता।

ऑफिस में हुए उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत का अधिकार : काम पर हुए यौन उत्पीड़न अधिनियम के अनुसार आपको यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का पूरा अधिकार है। इस मामले में हर विभाग में महिला उत्पीड़न समिति का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है।

नाम न छापने का अधिकार : यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को नाम न छापने देने का अधिकार है। अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिये यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती हैं।

घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार : ये अधिनियम मुख्य रूप से पति, पुरुष लिव इन पार्टनर या रिश्तेदारों द्वारा एक पत्नि, एक महिला लिव इन पार्टनर या फिर घर में रह रही किसी भी महिला जैसे माँ या बहन पर की गयी घरेलू हिंसा से सुरक्षा करने के लिये बनाया गया है। आप या आपकी ओर से कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है।

मातृत्व संबंधी लाभ के लिये अधिकार : मातृत्व लाभ कामकाजी महिलाओं के लिये सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि ये उनका अधिकार है। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत एक नयी माँ के प्रसव के बाद 06 महीने तक महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाती और वो फिर से काम आरंभ कर सकतीं हैं।

कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार : भारत के हर नागरिक का ये कर्त्तव्य है कि वो एक महिला को उसके मूल अधिकार – जीने के अधिकार का अनुभव करने दें। गभार्धान और प्रसव से पूर्व पहचान करने की तकनीक (लिंग चयन पर रोक) अधिनियम कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार देता है।

मुफ्त कानूनी मदद के लिये अधिकार : बलात्कार की शिकार हुई किसी भी महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है। स्टेशन हाउस ऑफिसर के लिये ये आवश्यक है कि वो विधिक सेवा प्राधिकरण को वकील की व्यवस्था करने के लिये सूचित करें।

रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार : एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज ऊगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही ये संभव है।

गरिमा और शालीनता के लिये अधिकार : किसी मामले में अगर आरोपी एक महिला है तो, उसपर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जाँच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिये।

संपत्ति पर अधिकार : हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नये नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला और पुरुष दोनों का बराबर हक है।