लक्ष्मी नारायण का पाट उत्सव आज

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। लक्ष्मी नारायण मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित हेमंत त्रिवेदी ने जानकारी देते हुए बताया है कि अक्षय तृतीया के दिन जो भी माँगलिक कार्य दान पूजन अनुष्ठान आदि जो भी किये जाते हैं वह अक्षय हो जाते हैं। उनका कभी क्षय नहीं होता है।

उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन ही पाण्डव पुत्र को सूर्य के द्वारा ही अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई। इस पात्र की मुख्य विशेषताएं थी कि इसमें भोजन कभी समाप्त नहीं होता था। इस पात्र के द्वारा ही युधिष्ठिर निर्धन लोगों को भोजन देकर उनकी सहायता करते थे।

उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी देवी के पूजन का विशेष महत्व है। इसी दिन सिवनी बस स्टैण्ड में स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण भगवान की स्थापना द्वारका, शारदा एवं ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के द्वारा संवत 2070 की अक्षय तृतीया 12 मई 2013 को की गयी थी। उस समय से प्रतिवर्ष अक्षय तृतीया को भगवान श्री लक्ष्मी नारायण जी का पाठ उत्सव मनाया ाता है।

अक्षय तृतीया के दिन लक्ष्मी नारायण मंदिर में प्रातः 06 बजे से 07 बजे तक दैनिक पूजन 07 बजे से 09 बजे तक भगवान श्रीलक्ष्मी नारायण का 1008 वस्तुओं द्वारा सहस्त्रार्जुन एवं हवन पूजन किया जाता है।

इसमें सभी भक्तगण हवन पूजन अर्चन कर सकते हैं इसके पश्चात भगवान की आरती एवं प्रसाद वितरण किया जाता है एवं शाम 06 बजे से 07 बजे तक दीपदान का कार्यक्रम रखा गया है। 07 बजे से 08 बजे तक महाआरती एवं महाप्रसाद का वितरण किया जायेगा।

लक्ष्मी नारायण मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर ने सभी धर्म प्रेमियों से पाटोउत्सव में अधिक से अधिक संख्या में मंदिर पहुँचकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।

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