माता-पिता शराब की लत पूरी करने बच्चों से मंगवा रहे भीख

 

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। राजधानी के एमपीनगर चौराहे पर शनिवार को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने तीन बच्चों को भीख मांगते हुए रेस्क्यू किया था। इस दौरान इनका पिता शराब के नशे में लड़खड़ाते हुए आया और बच्चों को ले जाने का विरोध करने लगा, लेकिन समिति ने तीनों बच्चों को आश्रयगृह में भेज दिया था। इनकी काउंसलिंग में सामने आया कि माता-पिता शराब की लत पूरी करने के लिए बच्चों से भीख मंगवा रहे थे।

खुशहान नौनिहाल के तहत समिति भोपाल के चौक-चौराहों पर भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को तीन माह से रेस्क्यू कर रही है। इसके तहत समिति ने 145 बच्चों की काउंसलिंग की है। समित के तीनों सदस्य निवेदिता शर्मा, राजीव जैन व कृपाशंकर चौबे की बेंच बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रही है। समिति ने बताया कि भिक्षावृत्ति में जितने भी बच्चों को रेस्क्यू किया गया है, उसमें अधिकतर मामलों में माता-पिता अपने नशे की लत को पूरा करने के लिए बच्चों से भीख मंगवा रहे हैं।

माता-पिता से भरवाते हैं वचन पत्र

सीडब्ल्यूसी बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता की भी काउंसलिंग कर रही है। इस दौरान माता-पिता से एक वचन पत्र भरवाया जाता है, जिसमें बच्चों से भीख न मंगवाने का शपथ रखी जाती है। साथ ही अभिभावकों को रोजगार मिल सके इसके लिए समिति प्रयास कर रही है। माता-पिता को हिदायत भी दी जा रही है कि अगर बच्चों से फिर से भीख मंगवाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।

मां नहीं है, पिता शराब पिता है

सीडब्ल्यूसी ने 15 मार्च को रेलवे स्टेशन से 1415 वर्ष के दो नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया था। काउंसलिंग में बच्चों ने बताया कि उनकी मां नहीं है और पिता शराब पीता है, इसलिए वह हमसे भीख मंगवाता है। समिति को कुछ दूरी पर उनका पिता भी शराब के नशे मिला था। उसकी भी काउंसलिंग की गई थी। समिति ने दोनों बच्चों को आश्रय गृह में रखने के निर्देश दिए थे।

शराब के नशे में मां हल्ला करती मिली

राजधानी के गौहर महल के पास ट्रैफिक सिग्नल से सीडब्ल्यूसी ने पिछले सप्ताह 9,1315 वर्ष के तीन बच्चों को भीख मांगते रेस्क्यू किया था। बच्चों ने बताया कि पिता नहीं हैं और मां भीख के पैसों से शराब पी लेती है। बच्चों के साथ समिति कमला पार्क के पास उनके घर पहुंची तो मां शराब के नशे में सड़क पर हल्ला करती मिली। टीम ने बच्चों को रेस्क्यू कर लिया और उन्हें आश्रय गृह भेज दिया।