भारत और फ्रांस के आसमानी परिंदों ने दुनिया को दिखाई अपनी ताकत

 

 

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

पणजिम (साई)। चीन और पाकिस्‍तान की बढ़ती सामरिक चुनौती के बीच भारतीय नौसेना और फ्रांस की नौसेना ने अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्‍यास किया है। एक मई को शुरू हुआ युद्धाभ्‍यास वरुणशुक्रवार को 10वें दिन दिख खत्‍म हो गया। वरुण युद्धाभ्‍यास के आखिरी दिन गोवा तट के पास अरब सागर में भारत और फ्रांस के नौसैनिक विमानों ने दुश्‍मन के दिल में सिहरन पैदा करने वाले हवाई करतब दिखाए।

फ्रांस की तरफ से चार राफेल लड़ाकू विमानों और भारत की तरफ से पांच रूस निर्मित मिग 29 के विमानों ने शानदार फ्लाईपास्‍ट किया। इस दौरान एयरफोर्स के हवाई निगरानी विमान ने भी हिस्‍सा लिया। युद्धाभ्‍यास के आखिरी दिन दोनों देशों की नेवी ने अपनी कमियों और उसके सुधार के उपाय पर फोकस किया। इस दौरान भारत और फ्रांस के हेलिकॉप्‍टरों ने एक-दूसरे के युद्धपोतों पर लैंड किया और सैनिकों को उतारा।

एक साथ नजर आए युद्धपोत

बता दें कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद महासागर के समुद्री मार्गों पर दुनियाभर की नजरें हैं। भारत और फ्रांस, चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव तथा दक्षिण चीन सागर में तनाव पैदा करने वाले इसके क्षेत्रीय दावों को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में दोनों देशों के इस बड़े कदम को काफी महत्वपूर्ण और चीन के लिए संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। इसी क्षेत्र में चीन अपने बेल्‍ट ऐंड रोड अभियान के तहत नौसैनिक ताकत बढ़ाने पर जोर दे रहा है। चीन पाकिस्‍तान के ग्‍वादर में नौसैनिक अड्डा विकसित कर रहा है।

फ्रांस के बेड़े (जिसमें उसका एकमात्र एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल है) की कमान संभाल रहे रियर ऐडमिरल ऑलिवियर लेबास ने कहा, ‘हमें लगता है कि हम इस क्षेत्र में ज्यादा स्थिरता ला सकते हैं, जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और जिसमें विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय कारोबार को लेकर बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है।एशिया और यूरोप तथा पश्चिम एशिया के बीच ज्यादातर कारोबार (खासतौर से तेल) समुद्र के जरिए होता है। इतना ही नहीं, समुद्र अपने तेल और गैस फील्ड्स को लेकर भी काफी समृद्ध है।

भारत के गोवा राज्य के तट पर 17वें सालाना युद्धाभ्यास में भाग लेने वाला करीब 42,000 टन का चार्ल्स डि गॉलेकुल 12 युद्धपोतों और पनडुब्बियों में से एक है। दोनों देशों के छह-छह युद्धपोत और पनडुब्बियों ने इसमें हिस्‍सा लिया। इस अभ्यास में फ्रांस ने अपने राफेल लड़ाकू विमानों को भी उतारा।

फ्रांस के अधिकारियों का कहना है कि यह युद्धाभ्यास 2001 में शुरू हुए इस अभियान का अब तक का सबसे व्यापक अभ्यास है। हिंद महासागर में भारत का पारंपरिक दबदबा चीन के बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है। चीन ने समुद्री मार्गों के पास युद्धपोतों और पनडुब्बियों की तैनाती भी की है। इसके अलावा बेल्ट ऐंड रोड इनिशटिवके जरिए चीन ने कमर्शल इन्फ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा नेटवर्क बनाया है, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया है।

क्षेत्र में फ्रेंच मेरीटाइम फोर्सेज के हेड रियर ऐडमिरल डिडिएर मालटरे ने कहा कि हिंद महासागर में चीन आक्रामक देश नहीं है। उन्होंने कहा, ‘आप चीन के आसपास समुद्र में जो कुछ देखते हैं- द्वीपों पर उसके दावे, हिंद महासागर में आप नहीं देखते हैं।दरअसल, फ्रेंच अधिकारी का इशारा दक्षिण चीन सागर में चीन के दावों को लेकर कई पड़ोसी देशों के साथ उपजे विवादों की तरफ था।

टॉप अफसर ने कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा नए सिल्क रोड ट्रेड रूट्स का निर्माण, जिसमें हिंद महासागर भी शामिल है, वास्तव में एक रणनीति है जो मुख्य रूप से आर्थिक और शायद दोहरे उद्देश्य को लेकर है। हालांकि मालटरे ने यह साफ नहीं किया कि दूसरा उद्देश्य क्या हो सकता है। उन्होंने यह जरूर कहा कि अगले 10 से 15 वर्षों में ऐसे हालात बन सकते हैं जिससे तनाव पैदा हो सकते हैं, हां चीन सागर की तरह बड़े निश्चित रूप से नहीं होंगे।

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