परीक्षण के नाम पर जनता को दूषित जल क्यों पिला रही नपा?

 

मुझे शिकायत नगर पालिका से है जिसके द्वारा पानी के शोधन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही पेयजल वितरण की प्रणाली को भी नहीं सुधारा जा रहा है जिसके कारण गर्मी के इन दिनों में पानी की समस्या को लेकर हाहाकार मचा हुआ है।

सिवनी में नयी टंकियों के माध्यम से कुछ क्षेत्रों में पेयजल वितरण का कार्य आरंभ किया गया है। नयी टंकी होने के कारण उसकी विशेष साफ-सफाई की आवश्यकता नहीं रह जाती है लेकिन उसके बाद भी नयी टंकियों से गंदा एवं बदबूदार पानी लोगों के घरों में पहुँचाया जाना आश्चर्यजनक है।

यह पानी अत्यंत मटमैला होता है जिसमें से बदबू भी आ रही होती है। कई सक्षम लोग तो रोजाना उबालकर और फिर से उसे ठण्डा करके उपयोग में ला रहे हैं लेकिन परेशानी निर्धन वर्ग की है जिनके द्वारा रोजाना पानी को उबाला जाना संभव नहीं होता है। ऐसे में वे इस दूषित जल का सेवन करके बीमार पड़ रहे हैं। इनमें से अधिकांश पेट से संबंधित बीमारियों की जद में आ रहे हैं।

इस संबंध में जब नगर पालिका से शिकायत की जाती है तो वहाँ से यही जवाब मिलता है कि इन दिनों नयी पाईप लाईन का परीक्षण कार्य किया जा रहा है इसलिये गंदा पानी आ रहा होगा। सवाल यह उठता है कि यह परीक्षण कार्य कितना लंबा जारी रहेगा, इसके बारे में स्थिति को स्पष्ट नहीं किया जा रहा है।

यदि नगर पालिका के द्वारा पाईप लाईन का परीक्षण किया जा रहा है तो बेहतर होगा कि जिन क्षेत्रों में यह कार्य चल रहा है उन क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति क्यों नहीं करवायी जा रही है? आखिर क्यों परीक्षण के नाम पर शहर की जनता को दूषित जल पीने के लिये बाध्य किया जा रहा है।

शहर के कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जहाँ इसके पहले ट्यूब वेल के जरिये पेयजल की आपूर्ति की जाती थी। बताया जाता है कि अब उसी पाईप लाईन को नयी टंकी से जोड़ दिया गया है लेकिन वहाँ भी गंदा और बदबूदार पानी आना समझ से परे इसलिये है क्योंकि यह पाईप लाईन पहले से उपयोग में लायी जा रही है।

यदि पुरानी पाईप लाईन को ही जोड़ा गया है तो उससे गंदा पानी कई दिनों तक नहीं आना चाहिये। इसका मतलब यही निकाला जा सकता है कि निश्चित तौर पर नगर पालिका के द्वारा अपने शहर की जनता के स्वास्थ्य के साथ गंभीर रूप से खिलवाड़ किया जा रहा है और उसके द्वारा जल शोधन संयंत्र में आवश्यक सामग्री का या तो उपयोग ही नहीं किया जा रहा है और या फिर उनकी आनुपातिक मात्रा संतोषजनक नहीं है। जिला प्रशासन से अपील है कि उसके द्वारा इस मामले में शीघ्र अतिशीघ्र जाँच करवायी जाकर नगर पालिका के दूषित पेयजल वितरण जैसे घिनौने खेल पर अंकुश लगाया जाये।