पक्के छज्जों को तोड़ने का काम आरंभ!

 

 

किसकी सलाह पर काम कर रहा स्वास्थ्य विभाग!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिला अस्पताल में सालों से चल रहे प्रयोग बंद होने का नाम नहीं ले रहे हैं। सोमवार को अस्पताल के पुराने भवन में बने छज्जों को मशीन से तोड़े जाने का काम आरंभ किया गया है। इसके पीछे यह वजह बतायी जा रही है कि अस्पताल में मरीजों के परिजनों के द्वारा इन छज्जों पर गंदगी फेंक दी जाती है।

प्रियदर्शनी इंदिरा गाँधी जिला अस्पताल के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एक बार फिर जिला अस्पताल को लेकर प्रयोग आरंभ हुए हैं। इस बार जिला अस्पताल में साफ सफाई न रख पाने के चलते होने वाली गंदगी से निजात पाने के लिये ठेकेदार या अस्पताल प्रशासन की मश्कें कसने की बजाय नयी कवायद की जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान अस्पताल विशेषकर अस्पताल के छज्जों (जिन्हें बारिश का पानी और धूप कॉरीडोर या खिड़की के अंदर आने के रोकने के लिये बनाया जाता है) पर गंदगी देखकर उनके द्वारा इसका कारण अस्पताल प्रशासन से जानना चाहा गया था।

सूत्रों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन के द्वारा छूटते ही यह बता दिया गया कि मरीजों के साथ आने वाले अनुचरों के द्वारा खाने पीने और अन्य गंदगी को छज्जों पर फेंक दिया जाता है। इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि इन छज्जों को ही तोड़ दिया जाये, न बाँस रहेगा न बाँसुरी बजेगी!

सूत्रों की मानें तो सीमेंट कांक्रीट के इन छज्जों को तोड़ने के बाद इसके स्थान पर शीट लगाये जाने का प्रस्ताव किसी के द्वारा अस्पताल प्रशासन को दे दिया गया है। इसके बाद से आनन फानन में इन छज्जों को मशीनों से तोड़ने का काम आरंभ हो गया है। इन छज्जों को तोड़े जाने के कारण उठने वाले शोर से मरीज दिन भर असहज ही महसूस करते रहे।

सूत्रों ने यह भी बताया कि इन छज्जों के स्थान पर अगर शीट लगायी जायेगी तो इसके लिये लोहे का फ्रेम बनाया जाकर उस पर शीट कसी जायेगी। इस काम में लाखों रूपये पानी की तरह बहा दिये जायेंगे, जबकि इस काम को आसानी से हल भी किया जा सकता था।

सूत्रों ने यह भी कहा कि अस्पताल में साफ सफाई का काम आऊट सोर्स किया गया है। अस्पताल में (भले ही छज्जे पर) अगर गंदगी है तो इसके लिये अस्पताल प्रशासन को आऊट सोर्स ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही करना चाहिये, जिसके लिये अस्पताल प्रशासन पूरी तरह सक्षम भी है।

सूत्रों ने कहा कि इस तरह ठेकेदार पर कार्यवाही करने की बजाय लोहे के एंगल लगाये जाकर शीट लगाये जाने में लाखों रूपये की बर्बादी का जिम्मेदार किसे ठहराया जायेगा। इसके अलावा ये शीट, साल दो साल में खराब भी हो जायेंगी फिर इन्हें दुबारा बदलना पड़ सकता है। अभी जिन छज्जों को तोड़ा जा रहा है वे दो तीन दशक पहले ढाले गये थे।

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