आरटीआई में बड़ी गड़बड़ी उजागर

 

 

 

 

सूचना मांगने वालों को थमा दिया जाता था कोरा कागज

(ब्यूरो कार्यालय)

भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर कोरे कागज ही थमा दिए जाते हैं। और तो और नकली हस्ताक्षर करके भी अपील खारिज की जा सकती है। ऐसे ही कई मामले राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने पकड़े हैं, जिसके बाद प्रदेशभर के दफ्तरों में हड़कंप की स्थिति है।

सूचना के अधिकार में भी कई फर्जीवाड़े के मामले सामने आ रहे हैं। मध्य प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने ऐसे कई मामले पकड़े हैं, जिसमें लोक सूचना अधिकारी ने या तो आवेदक को कोरे कागज भेज दिए या फिर आवेदक के नकली हस्ताक्षर करके अपील ही खारिज कर दी। एक मामले में सूचना आयुक्त ने रीवा के पुलिस अधीक्षक को जालसाजी की जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके बाद हड़कंप मचा हुआ है।

अधिकारियों के ऐसे होते हैं हथकंडे

आवेदक को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी नहीं देने के लिए सरकारी अधिकारी कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। इस तरह के मामले रीवा संभाग के प्रकरणों की सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह की पकड़ में आ गए।

एक मामला सिंगरौली के शासकीय विद्यालय देवसर से जुड़ा है। जहां आवेदक डॉ आरके झा ने एक प्राध्यापक की अंक सूची मांगी थी। अक्सर सरकारी पोस्टों पर नियुक्ति को लेकर इस तरह के फर्जीवाड़े की ख़बर आती हैं, जिसमें नकली दस्तावेजों के सहारे नौकरी हथिया ली जाती है। इसलिए इस प्रकरण में राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने दस्तावेजों को आवेदक को उपलब्ध कराने को कहा। बाद में सूचना आयुक्त ने खुद फोन पर आवेदक से जानकारी ली, तो पता चला कि आवेदक को जानकारी के नाम पर जो लिफाफा भेजा गया था, उस में सिर्फ कोरे कागज थे। आवेदक को यह लिफाफा शासकीय विद्यालय देवसर सिंगरौली के प्राचार्य की तरफ़ से जारी हुआ था।

कारण बताओ नोटिस जारी

इस लापरवाही पर राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने संज्ञान लेते हुए रीवा संभाग के अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा विभाग डॉ. सत्येन्द्र शुक्ला को तत्काल प्रभाव से डीम्ड पीआईओ नियुक्त करते हुए आवेदक को 15 दिन में जानकारी देने को कहा है। साथ ही यह भी कहा है कि जानकारी नहीं देने पर RTI के सेक्शन 20 (1) और 20 (2) के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही सूचना आयोग ने इस मामले में कोरें कागज भेजने के आरोपी लोक सूचना अधिकारी शासकीय विद्यालय देवसर, सिंगरौली के विरुद्ध 25000 रुपए की पेनल्टी लगाने के लिए कारण बताओ नोटिसभी जारी किया है।

अधिकारियों ने किया गोलमाल

एक और प्रकरण में सुनवाई के दौरान सूचना आयोग को पता चला कि आवेदक के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर रीवा के अधिकारियों ने अपील खारिज कर दी। मामला रीवा के जनता महाविद्यालय से जुड़ा हुआ है। आवेदक टीपी तिवारी सेवानिवृत्त प्राध्यापक ने कॉलेज के प्राचार्य की नियुक्ति सम्बंधित जानकारी मांगी थी। सुनवाई के दौरान महाविद्यालय के अधिकारियों ने आयोग को बताया कि जानकारी इसलिए नहीं दी गई, क्योंकि आवेदक ने लिखित में स्वयं जानकारी लेने से मनाकर दिया था। सुनवाई में मौजूद आवेदक ने हैरानी जताई और कहा कि उन्होंने कभी जानकारी लेने से मना नहीं किया और वो हस्ताक्षर भी उनके नहीं है।

पुलिस को दे दिया मामला

इस मामले में भी सख्त रुख अपनाते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने इस फर्जीवाड़े की जानकारी रीवा के पुलिस अधीक्षक आबिद खान को दे दी है। उन्होंने इस संबंध में पत्र लिखकर मामले की जांच करने को भी कहा है। साथ ही प्राचार्य जनता महाविद्यालय को 15 दिन के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया कि इस माले में अपीलार्थी को हर्जाना 3000 रुपए देने का आदेश भी जारी किया है।

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