विवाह में मुस्लिम समाज ने दिया आशीष

 

 

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। श्रीकृष्ण और नारायण में कोई अंतर है ही नहीं। नारायण में साठ और मुरली मनोहर श्रीकृष्ण में चौसठ गुण बताये गये हैं। नारायण की अपेक्षा श्रीकृष्ण में चार गुण अधिक हैं। रूप माधुरी, लीला माधुरी, वेग माधुरी और प्रिया माधुरी गुण। नारायण के चार हाथ हैं।

उक्ताशय की बात कटंगी रोड पर स्थित ग्राम मेहराबोड़ी में चल रही श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में आचार्य महेंद्र मिश्र श्रद्धालुजनों के समक्ष कही। गत दिवस रुक्मणी विवाह में 105 वर्षीय संत विजयानन्द गिरी महाराज श्रीपंच जूना अखाड़ा और संत बालक दास उदासी अखाड़ा के सन्त का आगमन हुआ। इसके साथ ही रुक्मणी विवाह में गाँव की ही बेटी आरती का शुभ विवाह संपन्न हुआ।

इस दौरान मुस्लिम समाज से आये भद्रजनों ने इस विवाह में सम्मिलित होकर गाँव की रुक्मणी स्वरूप बेटी आरती पंचेश्वर और अजय के विवाह में आशीष प्रदान करते हुए इस दंपत्ति के जीवन की मंगल कामना की।

आयोजक शिवलाल पंचेश्वर ने बताया कि आमगाँव के डॉ.राज कुमार परिवार ने वैदिक रीति से सर्वप्रथम रुक्मणी स्वरूप बेटी आरती पंचेश्वर का कन्यादान किया। विवाह कार्यक्रम के बाद जयदीप वैश्य का जन्मदिन भी हर्षाेल्लास से मनाया गया। आरती, प्रसाद वितरण के बाद सभी को भोजन प्रसादी प्रदान की गयी।

आचार्यश्री ने इस अवसर पर कहा कि प्रभु के हृदय में रहना अथवा परमात्मा को अपने हृदय में रखना यह तो परमात्मा की ही लीला है। आत्मा वैसे तो निराकार है और स्वतंत्र बंधन मुक्त ही है, किन्तु मन के कारण वह आबद्ध हो जाती है। भगवान तो मृत्यु के पूर्व ही मुक्ति देते हैं। प्रभु प्रेम में हृदय द्रवित होना ही मुक्ति है, मन मरा कि मुक्ति मिल गयी।